आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में किसान आंदोलन से जुड़े किसानों द्वारा 11अप्रैल से 17अप्रैल के बीच एम.एस.पी. सप्ताह मनाया जा रहा है। उसी कड़ी में आजमगढ़ में भी किसान आंदोलन से जुड़े विविध संगठनों( भारतीय किसान यूनियन,किसान संग्राम समिति,मजदूर-किसान एकता मंच,खेत मजदूर व किसान संग्राम समिति,अ.भा किसान सभा,अ.भा.किसान महासभा,जय किसान आंदोलन) के संयुक्त तत्वाधान में अमर शहीद कुंवर सिंह उद्यान में किसान इकट्ठा हुए और कलैक्ट्रेट भवन तक 'किसान-मार्च 'निकालकर जिलाधिकारी के जरिये राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपें।
किसान नेताओं ने कहा कि एमएसपी कृषि स्थिरता का एक अभिन्न अंग है। सभी कृषि उपजों पर एम.एस.पी. की कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए।इसके अभाव में 90फीसदी किसान लाभकारी मूल्य से वंचित हैं।
किसान आंदोलन का संविधान व लोकतंत्र पर अटूट विश्वास है। ज्ञापन के जरिये हम किसान आंदोलन के साथ सरकार के विश्वासघात और अन्याय को पटल पर लाना चाहते हैं। चुनावी गणित में जीतने वालों से न्यायालय को दबाव में नहीं आना चाहिए। घोर आश्चर्य व दुख का विषय है कि लखीमपुर खीरीं किसान हत्याकांड के साजिशकर्ता सत्तासीन कुर्सी पर कायम हैं, इतनी जल्दी किसानों के जघन्य हत्यारोपी मंत्रीपुत्र आशीष जमानत पर जेल से बाहर घूम रहा है और शहीद किसानों के पक्ष में खड़े किसानों को बिना जमानत दिये जेलों में सड़ाया जा रहा है और किसान गवाहों पर लगातार हमलें हो रहें हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री संजय अग्रवाल ने 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के नाम एक पत्र (सचिव/ऐएफडब्लू/2021/मिस/1) में वादा किया था कि देश के किसानों को एमएसपी मिलना कैसे सुनिश्चित किया जाय इसपर एक कमिटी बनायी जाएगी। अब तक सरकार ने न तो कमेटी के गठन की घोषणा की है, और न ही कमेटी के स्वरूप और उसकी मैंडेट के बारे में कोई जानकारी दी है।
सरकार का वादा था कि आन्दोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे "तत्काल प्रभाव से वापिस लिये जायेंगे"। अब तक सिर्फ हरियाणा सरकार ने कुछ कागजी कार्यवाई की है और केस वापिस लेने के कुछ आदेश जारी किए हैं। लेकिन हरियाणा में भी यह काम अधूरा है, किसानों को अब भी समन आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी की वह 54 में से 17 केस वापिस लेगी, लेकिन अभी तक न कोई सूचना है कि कौनसे केस वापिस लिए जायेंगे, न ही कोई सफाई है कि बाकी केस वापिस क्यों नहीं होंगे।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार अपने लिखित आश्वासन देकर हमारे मोर्चा उठवाने के बाद लागातार विश्वासघात कर रही है।
उक्त बातों के साथ ही किसान नेताओं ने बढ़ती हुई महंगाई और देश भर में सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने की प्रायोजित कोशिशों की घोर निंदा भी की।
कार्यक्रम में उपस्थिति दुखहरन राम,का.विनोद सिंह,रामकरन राम,का.वेदप्रकाश उपाध्याय,अवधराज यादव,का.नंदलाल, डा.रविन्द्रनाथ राय, का.ओमप्रकाश सिंह,अतुल,रामनिवास, राजेश रामराज, रामजीत ,सुदर्शन राम, राजकुमार ,हवलदार, कालिका प्रसाद ,बसंत, नंदलाल चौहान, मुरली, नखडू, दानबहादुर मौर्य, रामकृष्ण यादव, बैजनाथ, अवध राज यादव ,उमेश यादव, सम्राट कुमार आदि थे।