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बहरेपन का एकमात्र इलाज काक्लियर प्रत्यारोपण।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

कैंप में शनिवार को सात बच्चों की हुई स्क्रीनिंग

• आरबीएसके के अंतर्गत मंडलीय जिला चिकित्सालय में बहरेपन का एक दिवसीय कैंप सम्पन्न 

• मेहरोत्रा नाक, कान, गला हॉस्पिटल कानपुर की टीम ने की स्क्रीनिंग 

आजमगढ़, 18 अप्रैल 2022 : जो बच्चे बोल और सुन नहीं पाते उनके लिए आरबीएसके के अंतर्गत मंडलीय जिला चिकित्सालय में शनिवार को एक दिवसीय शिविर आयोजित हुआ। शिविर के दौरान मेहरोत्रा नाक, कान, गला हॉस्पिटल कानपुर की टीम ने सात बच्चों की स्क्रीनिंग इवाक्ड ओटोएकास्टिक इमीशंस (इओएइ) विधि से की। यह कहना है उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके सिंह का।
डॉ सिंह ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 12 बच्चों का काक्लियर प्रत्यारोपण कराया जा चुका है। भविष्य में जरूरी प्रपत्र जमा करने के पश्चात कानपुर में इन सभी बच्चों का निःशुल्क काक्लियर प्रत्यारोपण किया जायेगा। इसमें श्रवण दिव्यांगता से पीड़ित बच्चे सुन नहीं पाते, इसलिए भाषाई ज्ञान से वंचित होने से मानसिक रूप से भी पिछड़ जाते हैं। यह बच्चों में एक बड़ी समस्या है। तीन वर्ष की उम्र तक बच्चों में भाषा की समझ 85 फीसदी तक विकसित हो जाती है। यदि इस उम्र तक पहुंचने से पहले ही बच्चों को उचित जांच व उपचार की सुविधा मिल जाए तो वह सामान्य जीवन जी सकते हैं।

आरबीएसके के डीइआईसी मैनेजर डॉ आरिफ़ जमाल ने बताया कि कॉकलियर इंप्लांट ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सर्जरी के द्वारा कान के अंदरूनी हिस्से में लगाया जाता है, जो कान के बाहर लगे उपकरण से संचालित होता है। काक्लियर इंप्लांट सर्जरी बेहतर सुनने में बच्चों की  मदद करती है।
इसमें सर्जन द्वारा कान के पीछे इलेक्ट्रोड्स को फिट कर दिया जाता है। इसके बाद एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस जिसे रिसीवर कहते हैं, उसे कान के पीछे के हिस्से में लगा दिया जाता है। चार से छह सप्ताह के बाद इस डिवाइस का बाहरी भाग लगाया जाता है। और  बच्चों के गार्जियन को बताया जाता है कि इस डिवाइस के बाहरी भाग का उपयोग कैसे करना है तथा इसका रख-रखाव कैसे किया जाता है। 
बरहतिल, जहानागंज निवासी दो वर्षीय प्रज्ञा के पिता विजय ने बताया कि प्रज्ञा न तो बोल पाती है और न ही सुन पाती है। पहले आरबीएसके के डॉ को दिखाया गया था। उन्होने शनिवार को कैंप में बुलाया था। प्रज्ञा की मशीन से जांच हुई है।  डॉ ने आपरेशन के लिए बोला है। जरूरी प्रपत्र जमा करने के बाद एक से दो महीने  में प्रज्ञा का आपरेशन हो जायेगा। 
इदिलपुर, जहानागंज निवासी तीन वर्षीय परी के पिता पंकज ने बताया कि शुरू से ही परी न तो बोल पाती है और न ही सुन पाती है। पहले आरबीएसके के डॉ को दिखाया गया था। उन्होने शनिवार को कैंप में बुलाया था। परी की मशीन से जांच हुई है।  डॉ ने आपरेशन के लिए बोला है। जरूरी प्रपत्र जमा करने के बाद एक से दो महीने  में परी का निःशुल्क आपरेशन हो जायेगा।

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