लेख।
रिपोर्ट: वीर सिंह
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है।
सन् 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा दिया गया।
मोर सम्पूर्ण भारतीय प्रायद्वीप पर पाया जाता है।
मोर का ऐतिहासिक और धार्मिक मूल्य।
लेख: संसार में बहुत प्रकार के पक्षी होते हैं। कई पक्षी हमें अपने सौन्दर्य से आकर्षित करते हैं। उनमें से एक है देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर। इसका रंग बहुत ही सुंदर होता हैं और इसका कंठ नीला होता है। इसके सिर पर एक कलगी होती है। इसके पंख लम्बे नीले और सुनहरे रंग के होते हैं। मोर के पंखों पर चकते होते है। मोर की सुन्दरता को देखकर ही कवि रविन्द्रनाथ ने कहा था- “हे मोर तू इस मृत्युलोक को स्वर्ग के समान बनाने के लिए आया है।”
देश में लगभग सभी जगह पाए जाने वाले मोर में लगभग सभी रंगों का समावेश होता हैं। मोर की पंखो का रंग हरा होता है और मोर की पंखों में चाँद जैसी कई आकृतियां बनी हुई है जिसमें कई रंग सुसज्जित हैं।ये हमेशा ऊंचे स्थानों पर ही बैठना पसंद करते हैं। हमें मोर पीपल, नीम और बरगद के पेड़ों पर देखने के लिए आसानी से मिल जायेंगे। मोर के मुंह और गले का रंग बैंगनी होता है।मोर के पंख मखमल के कपड़े जैसे कोमल और बहुत सुन्दर होते हैं। मोर की आंखों का आकार छोटा होता है। मोर के पैरों का रंग पूरा सफ़ेद तो नहीं होता है, लेकिन सफ़ेद में थोडा मैला सा होता है। मोर हमारा राष्ट्रिय पक्षी है, हमें इसकी सुरक्षा करनी चाहिए।
सन् 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा दिया गया था। इस सम्मान का कारण मोर की सुंदर आकृति तो थी ही, मगर उससे भी ज्यादा अनर्घ्य था उसका ऐतिहासिक और धार्मिक मूल्य। एक और कारण यह भी था कि मोर सम्पूर्ण भारतीय प्रायद्वीप पर पाया जाता है और इसके विभिन्न प्रकार की वजह से हर कोई उसे पहचान सकता है।