आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
आज़मगढ़: एक तरफ पूरे देश में स्वच्छता अभियान तो दूसरी ओर सरयू नदी के अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। नदी की गहराई कम होने के साथ ही प्रदूषण व गंदगी भामार पड़ी होती है जिस पर जिम्मेदार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं जिसकी वजह से पवित्र सरयू नदी की आस्था पर गंदगी का ग्रहण लगा हुआ दिख रहा है आपको बता दें कि खैरघाट से लाटघाट होते हुए दोहरीघाट में सरयू नदी गंगा में विलीन हो जाती है सरयू की स्वच्छता के लिए प्रशासन या धार्मिक संगठनों ने खामोशी अख्तियार कर ली है। जीवन दायिनी सरयू का अस्तित्व अब खतरे में है। भारी-भरकम खर-फूस, मिट्टी, व केमिकल युक्त रंगों से बनीं मूर्तियों के हर वर्ष हो रहे विसर्जन से सरयू नदी का अस्तित्व खतरों में पड़ गया है। जिस पर प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है वही सरयू नदी के समीप स्थित गांव के ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी का मौसम चल रहा है यदि नदी की साफ सफाई होती तो हम अपने पशुओं को इसमें भूल सकते थे लेकिन इतना गंदा है कि यदि धूल दिया जाए बीमार पड़ सकते हैं