आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
• बाल कल्याण समिति के माध्यम से बालिकाएँ हुई पुनर्वासित
आजमगढ़, 26 मई 2022 : बच्चों के किसी प्रकार के शोषण के खिलाफ बाल कल्याण समिति या अन्य सक्षम पदाधिकारी समय-समय पर सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति या परिवार 18 वर्ष तक के बच्चों की समस्याओं के लिए समिति से मदद ले सकता है। यह कहना है प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी शशांक सिंह का।
डीपीओ ने बताया कि बाल कल्याण समिति उपेक्षित, देखरेख एवं संरक्षण निराश्रित, बाल विवाह तथा यौन उत्पीड़न शिकार लोगों का मार्गदर्शन करती है। इससे उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने में मदद मिलती है। 27 जुलाई 2021 से अब तक 218 मामले आए हैं। जिसमें 199 केस निस्तारित करते हुये बच्चों को उनके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है, जबकि पाँच बालिका एवं एक बालक को बालगृह में आवासित कराया गया है। तथा उन्हें भी उनके परिवार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि समिति में सदस्यों की तैनाती शासन की ओर से की जाती है। इस समिति का काम उपेक्षित निराश्रित बच्चों के मामलों का निस्तारण करना और उन्हें बाल संरक्षण गृहों में भेजना होता है। 18 वर्ष से कम उम्र का कोई भी बच्चा चाहे लड़का हो या लड़की जो निराश्रित हालत में कहीं मिलता है तो उसे बाल कल्याण समिति में पेश करना होता है, तथा समुचित कार्यवायी करते हुये उचित न्याय दिलाया जाता है। जरूरत पड़ने पर किसी भी कार्य दिवस में समिति बैठक कर सकती है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने लड़की का नाम न उजागर करते हुए बताया कि विगत 12 मई को 14 से 15 वर्ष के बीच की लड़की शबनम (काल्पनिक नाम) मोहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर भिक्षावृति में लिप्त पाई गयी थी। शबनम को स्टेशन पर अकेला देख एक जागरूक व्यक्ति ने जीआरपी पुलिस को बताया। पुलिस के पूंछतांछ करने पर पता चला कि वह घुमंतू परिवार से है। माता पिता को पूंछने पर बताया कि उनका पता नहीं है कि वह कहाँ हैं, संदेह होने पर पुलिस ने बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन से सम्पर्क किया। हैंडओवर लेने के बाद जरूरी जांच कराकर मैंने शबनम को बाल कल्याण समिति में पेश किया। समिति के अध्यक्ष ने उचित निर्णय लेते हुये शबनम को बालिका गृह में भेज दिया।
इसी क्रम में दूसरी घटना के बारे में चर्चा करते हुये चाइल्ड लाइन की जिला समन्वयक प्रतीक्षा राय ने बताया कि विगत 21 अक्टूबर को जिला महराजगंज थाना कोतवाली के अंतर्गत रहने वाली एक 16 वर्षीय लड़की शाइस्ता (काल्पनिक नाम) अपने ही गाँव के एक हिन्दू लड़के के साथ भागकर ट्रेन से मुंबई जा रही थी। जिसकी जानकारी जीआरपी के जवानों द्वारा बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन को हुई, उन्होंने उस लड़की के पास जाकर पूंछताछ शुरू कर दी। फिर जिला समन्वयक ने शाइस्ता को सपोर्ट देकर जीआरपी पुलिस से हैंडओवर लिया। परिवार वालों को सूचना देकर उन्हें बुलाया गया। लड़की घर वालों के साथ नहीं जाना चाहती थी। नाबालिग शाइस्ता को अगले दिन बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट/अध्यक्ष रजनीश श्रीवास्तव के समक्ष प्रस्तुत किया गया, उनके द्वारा शाइस्ता और परिवार वालों की अलग-अलग काउंसलिंग की गई फिर लड़की की सहमति बनने पर उसे उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया।
उपरोक्त दोनों केसों में रेलवे, बाल कल्याण समिति के साथ चाइल्ड लाइन संस्था का भी सहयोग रहा। आज अगर कोई बच्चा संकट में हो तो 1098 जोकि 24 घंटे टोल फ्री नंबर है, पर कॉल करना चाहिए, ताकि उन्हें समुचित सहायता मिल सके। कुल मिलाकर बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन का उद्देश्य है कि किसी भी समस्या या मुसीबत में फंसे बच्चों को सभी प्रकार की मदद पहुंचाना है।