आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
• टीकाकरण माइक्रोप्लान को गुणवत्तापूर्ण बनाने को लेकर कार्यशाला
• घर-घर जाकर शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती का आशा करेंगी सर्वे।
आजमगढ़, 23 मई 2022 : नियमित टीकाकरण को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में सोमवार को एमओआइसी और बीपीएम, ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम), प्रशिक्षित किए गए। उन्हें बताया गया कि कार्ययोजना तैयार कर नियमित टीकाकरण पर जोर दें। इससे मातृ-मृत्यु और शिशु मृत्यु-दर में घटाई जा सकती है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी का।
डॉ तिवारी ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य ईकाईयों के अंतर्गत आने वाले गांव, मजरों में बुधवार और शनिवार को टीकाकरण के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया। अगर कार्य योजना अच्छी बनेगी तो छूटे हुये बच्चों और गर्भवती को जायदा से ज्यादा आच्छादित किया जा सकेगा।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने नए सृजित उपकेंद्रों के अंतर्गत क्षेत्र का बंटवारा करते हुए और बड़े क्षेत्रों को पुनर्गठित कार्ययोजना बनाने के लिए विस्तृतरूप से बताया। उन्होंने कहा कि कार्ययोजना बनाने, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने तथा संवाद परामर्श कौशल सुदृढ़ करने में सहयोग मिलेगा। डीआईओ ने बताया कि बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) सत्र के दौरान बच्चों एवं गर्भवती को टीके लगाए जाते हैं। यह टीके टिटनेस, गलाघोंटू कालीखांसी, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, दस्त रोग (डायरिया), हेपेटाइटिस, टीबी, पोलियो, चेचक (खसरा), रुबेला, जापानी मस्तिष्क ज्वर से बच्चों एवं गर्भवती का बचाव करते हैं।
डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. पदम जैन ने बताया कि इस दौरान आशा द्वारा सर्वे कराया जाये। बच्चों और गर्भवती के टीकाकरण की ड्यू लिस्ट तैयार किया जाये। उन्होंने कहा कि इस सत्र को आयोजित करने में आशा कार्यकर्तता व संगिनियां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वह ही बच्चों की ड्यूलिस्ट तैयार कर सत्र के दिन सत्र स्थल पर लाभार्थियों को बुलाकर टीकाकरण कराना सुनिश्चित कराती हैं। संगिनियों को ड्यूलिस्ट बनाने की प्रक्रिया, टीका के लिए आने वाले दिनों में प्रशिक्षण दिया जायेगा। टीके से छूटे हुये बच्चों को कहां-कहां और कैसे खोजा जाए सहित अन्य विषयों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। हाईरिस्क क्षेत्र को चिन्हित करने, ईट भट्ठों का भी सर्वे कर कार्ययोजना में शामिल किया जाये।
इसके साथ ही नियमित टीकाकरण के फायदे, इसके रख-रखाव के तरीके, किस रोग में कौन सा टीका देना चाहिए एवं सुरक्षित इंजेक्शन एवं टीकाकरण के कचरे को निष्पादन करने के बारे में जानकारी दी गई। यूनिसेफ के डीएमसी प्रवेश मिश्रा ने कम्युनिकेशन प्लान बनाने के लिए विस्तृतरूप से बताया।
प्रशिक्षण में सभी एसीएमओ ,एमओआईसी, बीपीएम, बीसीपीएम, यूएनडीपी से पूनम शुक्ला, आरआई से सतीश पाठक मौजूद रहे।