आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
क्या युवा वर्ग भारतीय संस्कृति से दूर होता जा रहा है
सांस्कृतिक विरासत को संभालने का समय
युवा वर्ग को समझाने की जरूरत
लेख: आज की युवा पीढ़ी के आचार-व्यवहार पर नजर दौड़ाई जाए, तो यह कहना लाजिमी है कि आज का युवा भारतीय संस्कृति से दूर होता जा रहा है। धर्म के रीति-रिवाज, क्रियाकांड में नई पीढ़ी को कोई दिलचस्पी नहीं है और पाश्चात्य संस्कृति हावी होती जा रही है। समाज दिशाहीन हो रहा है,भारतीय संस्कृति समूचे विश्व को आकर्षित करती है, लेकिन हम भारतीय ही अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहें हैं। दिन प्रतिदिन हम पश्चात्य संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं और हमारी संस्कृति सिर्फ पुस्तकों और कहानियों में ही कहीं गुम होती जा रही है। सबसे अहम है हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना। त्याग, सम्मान, संयम, सत्य, अहिंसा, अध्यात्म ये सभी हमारी संस्कृति की पहचान रहे हैं। जहां हम कभी गर्व करते थे अपनी संस्कृति पर, वहीं आज का युवा वर्ग का मोह पश्चिमी संस्कृति की तरफ बढ़ता जा रहा है। रहन-सहन तो पूरी तरह बदल ही चुका है, अपने सिद्धान्तों और मूल्यों से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है।वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण की चकाचौंध में युवा वर्ग हमारी पुरातन संस्कृति की महान विरासत को भूले जा रहा हैं। दूरियां इतनी बढ़ी हैं कि नैतिक मूल्यों का पतन होने लगा है, मानवता कराहने लगी है। आपसी सौहार्द, प्रेम और भाईचारे के पर्व फीके पड़ते जा रहे हैं। युवाओं की सोच दिखावे वाली बनती जा रही है। हमें याद रखना होगा कि नैतिकता, अपनत्व और देशभक्ति जैसे मूल्यों ने ही भारतीय संस्कृति को बनाए रखने में योगदान दिया है। युवा वर्ग का भारतीय संस्कृति से दूर होना देश के लिए कदापि उचित नहीं हो सकता। इसलिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए हम सभी को आगे आना होगा।