Breaking News

लोकतंत्र महज मस्तक गणना नहीं बल्कि जिन्दा और जागरूक मस्तिष्क से फलता-फूलता हैं।


आज़मगढ़।

लेख: लोकतंत्र, जनतंत्र और प्रजातंत्र, इन तीनों शब्दों का निहितार्थ हैं जनता का राज। लोकतंत्र में आम जनमानस स्वतन्त्रता और समानता का एहसास करते हुए अपनी इच्छा के अनुरूप एक निश्चित अवधि के लिए अपना शासक चुनता है। देश के जनमानस की इच्छा, अभिव्यक्ति और अभिमत को ही राजनीति विज्ञान की भाषा में जनमत कहा जाता हैं। जनतंत्र की गुणवत्ता का आकलन जनमत से ही किया जाता  है। एक स्वस्थ लोकतंत्रिक देश में जनमत का निर्माण उस देश के नेताओं , समाचार पत्रों, पत्रिकाओं सहित सम्पूर्ण प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित सूचना संचार के साधनों , लोकतंत्र में आस्था रखने वाले बौद्धिक समुदाय द्वारा सम्पन्न गोष्ठियों ,न्यायिक निर्णयों और न्यायविदों की टिप्पणियों , राजनीतिक दलों के विभिन्न कार्यक्रमों तथा सम्मेलनों और जनमानस के बीच होने वाली चर्चा परिचर्चा और विचार- विमर्श द्वारा होता हैं । सचरित्र, ईमानदार, बचनबद्ध ,सच्ची जनसेवा की भावना रखने वाले  और पढें-लिखें नेता अपने भाषण और विचार द्वारा  तार्किक, बौद्धिक, विवेकसम्पन्न , जागरूक , वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण और सक्रिय जनमत का निर्माण करते हैं। इसके विपरीत चुनावी मौसम भाॅपकर गिरगिटों की तरह रंग बदलने वाले, बेईमान, धूर्त, आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे, घोर जातिवादी और साम्प्रदायिक मानसिकता से ग्रसित नेता कुंठित, संकीर्ण, उन्मादी , नकारात्मक और निष्क्रिय जनमत का निर्माण करते हैं। इसी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक सूचना संचार के औजार स्वस्थ, सहिष्णु, सचेत और बौद्धिक  जनमत का निर्माण करते हैं। जबकि दिन-रात सत्ता की चौखटो का चालीसा गाने वाले तथा चाट-भारण परम्परा के सूचना संचार के औजार कूपमंडूक , अंधभक्ति से परिपूर्ण और भेंड चाल वाले जनमत का निर्माण करते हैं। देश के बौद्धिक समुदाय द्वारा भी जनमत का निर्माण किया जाता हैं। जब बौद्धिक समुदाय ईमानदारी, निष्पक्षता और निःस्वार्थ भावना से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर अपना विचार प्रस्तुत करता है तो बौद्धिक, तार्किक और विवेक पूर्ण जनमत का निर्माण करते हैं। इसके विपरीत सत्ता सुख की चाहत रखने वाले तथा चाॅदी के सिक्कों पर बिकने वाले बुद्धिजीवी संकीर्ण, सतही और संकुचित सोच वाला जनमत तैयार करते हैं। जबतक स्वस्थ, स्वतंत्र, निर्भीक, बौद्धिक, जागरूक और सक्रिय जनमत नही होगा तब तक जनमानस को सुयोग्य, सचरित्र, ईमानदार और उर्जावान नेतृत्व नहीं मिल पाएगा।

लेखक: मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता 
बापू स्मारक इंटर काॅलेज दरगाह मऊ।

और नया पुराने