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19 जुलाई को मनाई जाएगी पूर्व विधायक स्व सर्वेश सिंह सीपू की 9वीं पुण्यतिथि।


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: सगड़ी विधानसभा के पूर्व विधायक रहे सर्वेश सिंह सीपू की पुण्यतिथि 19 जुलाई को जीयनपुर स्थित सेंट जेवियर स्कूल में मनाई जाएगी। इस वर्ष 9वीं पुण्यतिथि के रूप में पूर्व विधायक  स्वर्गीय सर्वेश सिंह सीपू  को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 
आपको बता दें कि 19 जुलाई 2013 को बदमाशों ने स्व. सीपू सिंह की हत्या उनके आवास के सामने गोली मारकर कर दी थी। उनके साथ भरत राय, संजय विश्वकर्मा, जितेंद्र गुप्ता, चंद्रभान चौबे की भी मौत हो गई थी। जिसके बाद उनकी याद में प्रतिवर्ष क्षेत्र की जनता अपने लोकप्रिय विधायक सहित इन चार लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचती है। लोग श्रद्धा के साथ विधायक को पुष्प अर्पित कर उन्हें याद करते हैं। 19 जुलाई को पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस बहुचर्चित हत्याकांड के फैसले पर सभी की निगाह थी। देर से ही सही लेकिन सगड़ी के पूर्व विधायक बंदना सिंह को न्याय मिला। 
स्वर्गीय सर्वेश सिंह सीपू  हत्याकांड के दौरान वे बहुजन समाज पार्टी में थे। जिसके बाद उनकी पत्नी  बंदना सिंह को बसपा से टिकट मिला और वह  सगड़ी विधानसभा से विधायक बनी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ सगड़ी विधानसभा के विकास पर जोर दिया। लेकिन किसी गैर पार्टीगत गतिविधियों मैं शामिल  होने का आरोप लगाकर बहुजन समाज पार्टी  प्रमुख  मायावती द्वारा उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया  जिसके बाद उन्होंने  भाजपा सदस्यता ग्रहण कर हाल ही में बीते  2022 विधानसभा चुनाव में सगड़ी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रूप में चुनाव लड़ीं। हालांकि इस बार जनता ने उन्हें अपने विधायक के रुप में स्वीकार नहीं किया। 
वैस तो सर्वेश सिंह सीपू को राजनीति अपने पिता पूर्व मंत्री स्वर्गीय राम प्यारे सिंह से विरासत में मिली थी। सगड़ी क्षेत्र के अमुवारी नरायनपुर गांव निवासी सीपू सिंह के पिता रामप्यारे सिंह को अमर सिंह का बेहद करीबी माना जाता था। रामप्यारे सिंह ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अजमतगढ़ ब्लाक के प्रमुख के रूप में शुरू की। वर्ष 1992 में सपा के गठन के बाद वे मुलायम सिंह के साथ हो गए। रामप्यारे सिंह वर्ष 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। पार्टी ने वर्ष 2002 में सगड़ी विधानसभा से दोबारा टिकट दिया लेकिन रामप्यारे सिंह को हार का सामना करना पड़ा। चुंकि रामप्यारे सिंह अमर सिंह के चलते मुलायम सिंह के भी काफी करीबी हो गए थे। इसलिए हार के बाद भी उन्हें न केवल विधान परिषद भेजा गया, बल्कि वर्ष 2003 में सपा मुखिया मुलायम सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में जगह देते हुए पर्यावरण मंत्री बनाया। इस बीच वे कैंसर से पीड़ित हो गए। ऐसे में छोटे पुत्र सर्वेश सिंह उर्फ सीपू ने राजनीतिक क्षेत्र में सक्रियता दिखाई। इसी बीच दो साल बाद रामप्यारे सिंह का 31 मई 2005 को निधन हो गया। स्व.रामप्यारे सिंह की सगड़ी विधानसभा क्षेत्र में तैयार की गई राजनीतिक जमीन का फायदा सर्वेश को मिला। वर्ष 2007 में सर्वेश ने सपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की।
वर्ष 2010 में अमर सिंह सपा से अलग हुए और लोकमंच का गठन किया तो सीपू ने भी पिता के मित्र का साथ दिया और समाजवादी पार्टी छोड़ दी। अमर सिंह सीपू को पुत्र की तरह मानते थे जिसके कारण उन्होंने सीपू को लोकमंच में साथ रखने के बजाय वर्ष 2011 में बसपा में शामिल करा दिया। इसके साथ ही सर्वेश के बड़े भाई संतोष सिंह उर्फ टीपू भी बसपा में आ गए। वर्ष 2012 के विधानसभा में बसपा मुखिया मायावती ने सर्वेश सिंह सीपू को सदर विधानसभा व उनके बड़े भाई संतोष सिंह टीपू को सगड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ाया। उस समय सपा की लहर में दोनों भाई चुनाव हार गए और जिले की दस विधानसभा सीटों में से नौ पर सपा को जीत मिली। लेकिन सीपू ने सपा के बाहुबली दुर्गा प्रसाद यादव को कड़ी टक्कर दी थी। हारने के बाद भी सर्वेश सिंह सीपू अपने पिता की तैयार की हुई जमीन को संवारने में लगे रहे। सरल स्वभाव के कारण सीपू लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कहा तो यहां तक जाता था कि सीपू ही वह नेता है जो दुर्गा प्रसाद यादव के अजेय क्रम को तोड़ सकता है। लेकिन 19 जुलाई 2013 को पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। इस दौरान सीपू के करीबी भरत राय व एक अन्य व्यक्ति बदमाशों की गोली का शिकार हुए।सीपू की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगा सकते हैं कि उनकी हत्या के बाद हजारों लोग सड़क पर उतर जमकर तोड़फोड व आगजनी किये। कोतवाली तक पर भीड़ ने हमला कर दिया। सीपू की हत्या में माफिया ध्रुव कुमार सिंह कुंटू व उसके साथियों को आरोपी बनाया गया है। हत्या के बाद जिले में बिगड़ती कानून व्यवस्था और जनता के दबाव में राज्य सरकार ने मामले के सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सात साल पहले हुए इस हत्याकांड में दर्ज मुकदमे में कुछ हिस्से की विवेचना जहां जनपद पुलिस द्वारा की गयी तो कुछ हिस्से की विवेचना सीबीआई ने की थी। 

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