आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आशा संगिनी एवं आशा बहू कल्याण समिति की अध्यक्ष संध्या सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
आज़मगढ़: देश में कोरोना महामारी के जोखिम के बीच शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने का काम कर रहीं मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता यानी आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार की भेदभावकारी नीतियों के खिलाफ बिगुल बजा दिया है. सरकारी नीतियों से खफा आशा संगिनी एवं आशा बहू कल्याण समिति की अध्यक्ष संध्या सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिलकर मानदेय ना मिलने से नाराजगी जताई और एक ज्ञापन सौंपा।
जिसमें उन्होंने बताया कि यदि 25 जुलाई तक बचा हुआ बाकी मासिक मानदेय नहीं मिलता है तो ऐसी स्थिति में हमारी सभी आशा एवं आशा संगिनी बहने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करेंगी।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी बताया कि विगत सप्ताह इलाज के अभाव में आशा कार्यकर्ती कैंसर पीड़ित की मौत हो गई। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि हमारी प्रत्येक बहनों का आयुष्मान कार्ड बना होता तो वह उसकी मदद से इलाज करा सकती थी लेकिन प्रशासन की लापरवाही ने हमारी एक बहन की जान ले ली और हम लोग इस तरह की लापरवाही को हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रशासन से हमारी मांग है कि हमारी प्रत्येक बहनों के लिए जल्द से जल्द आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी हो तो उसका उचित इलाज कराया जा सके। इस संदर्भ में संध्या सिंह ने बताया कि हमारी आशा बहनों को नियमित वेतन सुनिश्चित करना, सरकारी कर्मचारियों के तौर पर मान्यता देना, कोरोना वॉरियर्स के तौर पर इनके लिए बीमा राशि का बंदोबस्त करना हमारी मांगो में है। आज कोरोना के खतरे और निश्चित वेतन नहीं होने की दोहरी मार से जूझ रहीं आशा कार्यकर्ता बंधुआ मजदूरों की तरह काम करने को मजबूर हैं।