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लेख: ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) जोड़ों में दर्द (Joints Pain) व सूजन एक आम समस्या (Problem) है. इसके कई कारण हो सकते हैं. उनमें से ही एक है ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis), जिसकी वजह से चलना-फिरना भी दूभर हो जाता है.
ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों से संबंधित एक प्रमुख बीमारी है. शरीर में जहां दो हड्डियां आपस में जुड़ती हैं, उसे ज्वॉइंट यानी जोड़ कहते हैं. हड्डियों के अंतिम सिरे को सुरक्षित रखने के लिए एक प्रोटेक्टिव टिशू होता है, जिसे कार्टिलेज कहते हैं. जब किसी कारण से कार्टिलेज टूट जाता है या उसमें दरार पड़ जाती है तो इसके कारण हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं, नतीजतन दर्द, अकड़न या अन्य तरह की समस्याएं होती हैं. इस स्थिति को ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं. वैसे तो यह समस्या किसी को भी हो सकती है,
आमतौर पर यह बीमारी अधेड़ावस्था यानी 40 से 50 या इससे अधिक उम्र वाले लोगों में इसके होने की आशंका ज्यादा होती हैं। लेकिन शहरी जीवन में यह बीमारी युवाओं और बच्चों में भी दिखायी दे रही है। जोड़ों में दर्द होना, जोड़ों में तिरछापन, चाल में खराबी, यानी चलने-फिरने की क्षमता का कम होना जैसे लक्षण इस बीमारी में दिखाई देते हैं। लेकिन आमतौर पर उम्रदराज़ लोगों को ज़्यादा होती है. ऑस्टियोआर्थराइटिस को डिजेनेरेटिव आर्थराइटिस या वियर एंड टियर आर्थराइटिस भी कहते हैं.
ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण
यह बीमारी जोड़ों के क्षतिग्रस्त होने के कारण होती है. यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि समय के साथ जोड़ों की रक्षा करने वाला कार्टिलेज धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होते जाता है. यही कारण है कि यह बीमारी उम्रदराज़ लोगों को ज़्यादा होती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, जोड़ों के क्षतिग्रस्त होने का ख़तरा बढ़ता जाता है.
अन्य कारण
चोट के कारण कार्टिलेज में दरार, जोड़ों का डिस्लोकेट होना, लिंगामेंट में चोट, मोटापा, खराब पोश्चर इत्यादि ऑस्टियोआर्थराइटिस होने के अन्य प्रमुख कारण हैं.
ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर के किसी भी जोड़ में हो सकता है, लेकिन यह सामान्यतौर पर शरीर के निम्न जोड़ों को प्रभावित करता है.
1. हाथ
2. उंगलियां
3. घुटने
4. कुल्हे
5. रीढ़ की हड्डी, ख़ासतौर पर गर्दन और पीठ का निचला हिस्सा
ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रमुख लक्षण
1. दर्दप प्रभावित जोड़ को दबाने पर दर्द महसूस होना
ऑस्टियोआर्थराइटिस की जांच
ऑस्टियोआर्थराइटिस धीरे-धीरे विकसित होनेवाली बीमारी है, इसलिए जब जोड़ों में दर्द व अन्य तरह के संकेत न दिखें, तब तक इसका पता लगाना मुश्किल होता है. किसी तरह का एक्सिडेंट या चोट लगने की स्थिति में एक्स-रे करवाने पर ऑस्टियोआर्थराइटिस का पता लगाया जा सकता है. एक्स-रे के अलावा एमआरआई स्कैन की मदद से भी इसकी जांच की जाती है. इसके अलावा ब्लडटेस्ट, ज्वॉइंट फ्लूइड एनालिसिस की मदद से भी इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है.
ऑस्टियोअर्थराइटिस के होते हैं 5 स्टेज:
स्टेज 0 में आपके घुटने पूरी तरह "सामान्य" होते हैं। यानि अगर आपको घुटनों में दर्द की समस्या होती है, तो इसका कारण ऑस्टियोअर्थराइटिस नहीं बल्कि घुटनों का ही कोई अन्य रोग हो सकता है।
स्टेज 1 ऑस्टियोअर्थराइटिस
स्टेज 1 होने पर व्यक्ति में बहुत हल्के और सामान्य लक्षण देखे जाते हैं। इसमें आमतौर पर आपको हड्डियों के जोड़ों के पास की हड्डी कुछ बढ़ी हुई लगती है यानि हड्डियों में असामान्य विकास ऑस्टियोअर्थराइटिस का पहला लक्षण है। आमतौर पर स्टेज 1 ऑस्टियोअर्थराइटिस में दर्द नहीं होता है या बहुत कम और कभी-कभी होता है।
स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस
स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस में लक्षण और अधिक उभर आते हैं। जब जोड़ों पर कोई हड्डियां या कई हड्डियां ज्यादा बढ़ती हुई दिखाई देती हैं, तो डॉक्टर एक्सरे द्वारा इसका पता लगाते हैं। स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस में आमतौर पर हड्डियों में उभार देखा जाता है मगर कार्टिलेज इस समय तक स्वस्थ होते हैं। इस स्टेज में आमतौर पर जोड़ों में पाया जाने वाला सिनोवियल फ्लूइड भी पर्याप्त होता है जिससे आपको चलने-फिरने, उठने-बैठने और घुटनों को मोड़ने आदि में परेशानी नहीं होती है।
लेकिन स्टेज 2 के मरीजों को आमतौर पर ज्यादा चलने पर या ज्यादा मेहनत करने पर जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है या कई बार घंटों एक जगह बैठने के कारण और लेटने के कारण दर्द की शिकायत हो जाती है।
स्टेज 3 ऑस्टियोअर्थराइटिस
ये बीच की यानि "मध्यम" स्टेज है। इस स्टेज में मरीज के कार्टिलेज थोड़ा-थोड़ा प्रभावित होने लगता है और हड्डियों के बीच की जगह सिकुड़ने लगती है। स्टेज 3 ऑस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों को चलने-फिरने या झुकने के दौरान अक्सर ही दर्द की शिकायत रहने लगती है। लंबे समय तक बैठे रहने के बाद अक्सर उनकी हड्डियां अकड़ जाती हैं। ज्यादा चलने और मेहनत करने के बाद जोड़ों में सूजन की समस्या भी देखी जा सकती है।
स्टेज 4 ऑस्टियोअर्थराइटिस
स्टेज 4 आते-आते ऑस्टियोअर्थराइटिस "गंभीर" रूप ले लेता है। स्टेज 4 के मरीजों को इस बीमारी में तेज दर्द का सामना करना पड़ता है। इस स्टेज में मरीज के लिए चलना-फिरना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि अंगों को इधर-उधर हिलाने-डुलाने से ही तेज दर्द महसूस होता है। इस स्टेज में जोड़ों के बीच हड्डियों के बीच की जगह बहुत ज्यादा सिकुड़ जाती है और कार्टिलेज लगभग पूरी तरह खत्म हो चुके होते हैं। मरीज की हड्डियों के बीच सिनोवियल फ्लूइड भी बहुत कम हो जाता है। जिसके कारण हड्डियों के बीच की चिकनाई खत्म हो जाती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज
ऑस्टियोआर्थराइटिस को जड़ से ख़त्म करना मुश्किल है, लेकिन इलाज के माध्यम से इसके लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है. हालांकि इलाज ज्वॉइंट के लोकेशन पर निर्भर करता है. ट्रीटमेंट के लिए ओटीसी मेडिसिन, जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपायों का इस्तेमाल किया जाता है. इनकी मदद से दर्द को कम करने की कोशिश की जाती है. जोड़ो के दर्द में हड्डी के डॉक्टर की सलाह तुरंत लेनी चाहिए लापरवाही करने पर समस्या बढ़ सकती है
लेखक- डॉ मसरुर: डॉ मिर्जा मसरूर
एसोसिएट प्रोफेसर (फैकेल्टी आफ मेडिसिन)
डायरेक्टर सेंटर फॉर प्रमोशन आफ मेडिकल रिसर्च,
ए.आइ.यू, बिसकेक, केजी