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भगत सिंह के 115वें जन्मदिन पर 'शहीद स्मृति सभा व सांस्कृतिक कार्यक्रम' का आयोजन।


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम( AIPSF) इकाई आज़मगढ़ की तरफ से महान क्रांतिकारी व छात्रों-नौजवानों के इंकलाबी आदर्श 'शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ' के 115वें जन्मदिन पर सबसे पहले वीर कुँअर सिंह उद्यान फिर मजदूर जुटान स्थल सिधारी पूल और भगत सिंह प्रतिमा रैदोपुर पर पुष्प अर्पण-माल्यार्पण कार्यक्रम के बाद 'शहीद स्मृति सभा' व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में सभी साथियों ने भगत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद उन्हें  सलामी दिया। पार्क में टहलने आये नागरिकों और काम के लिए इकट्ठा दर्जनों दिहाड़ी मजदूरों ने भी भगत सिंह को सलाम करते हुए पुष्प अर्पित किया। हमारे छात्र संगठन को इस तरह का कार्यक्रम हमेशा करने का समर्थन व हौसला दिया।

भगत सिंह के मशहूर नारे - इंकलाब जिंदाबाद / पूंजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद सहित शहीद भगत सिंह अमर रहें, भगत सिंह का ये पैगाम / सबको शिक्षा-सबको काम, भगत सिंह तेरे सपनों को मंजिल तक पहुचायेंगे, सबको मुफ्त व वैज्ञानिक शिक्षा - स्वास्थ्य की गारंटी लो, सबको स्थाई रोजगार की गारंटी लो, शिक्षा विरोधी NEP-2020 को रद्द करो, मजदूर विरोधी लेबर कोड रद्द करो, छात्रों-मजदूरों-किसानों की एकता जिंदाबाद, सबके सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की गारंटी लो! जैसे नारों के साथ भगत सिंह के विचारों पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

छात्रों ने मिलकर "ए भगत सिंह तू जिंदा है, हर एक लहू के कतरे में / हर एक लहू के कतरे में, इंकलाब के नारे में..." व " याद करे कुर्बानी भगत सिंह तेरी वो कुर्बानी// जो जगाए जवां दिलों में तेरी अमर कहानी..." सहित   "भगत सिंह इस बार ना लेना काया भारतवासी की / देशभक्ति के लिए आज भी सजा मिलेगी फाँसी की.." जनगीत गाकर भगत सिंह को याद किया गया।
'शहीद स्मृति सभा' में संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी संगठन व साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ छिड़े जंग में आगे बढ़कर जो बलिदान दिया उसे देश के करोड़ों लोग दिल से सलाम करते हैं। आज भगत सिंह को उनके जन्मदिन पर भारत के साथ पाकिस्तान व बांग्लादेश के करोड़ों लोग याद कर रहे हैं, लाखों जगहों पर विभिन्न कार्यक्रम  हो रहे हैं और भगत सिंह के सपनों का शोषणविहीन समाज बनाने के लिए साझा संघर्ष का आह्वान कर रहे हैं।

भगत सिंह ने अपने किताबों, लेखों और जेल डायरी में भारतीय क्रांति के लिए जो सिद्धांत दिया वह वैज्ञानिक समाजवाद था। उनका मानना था कि गोरे अंग्रेजों (पूंजीपतियों) के स्थान काले अंग्रेज( भारत के जमींदार व पूंजीपति) सत्ता में आ जाएंगे तो समाज में किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकेगा। भारत के मजदूरों-मेहनतकशों को संगठनबद्ध होकर सबको मुफ्त व वैज्ञानिक शिक्षा-स्वास्थ्य ,स्थाई रोजगार, पोषण-आवास, सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा व इंसानी सम्मान देने की गारंटी करने वाले समाजवादी समाज का निर्माण करना होगा।तभी शोषणविहीन समाज बनेगा। एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान का और एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का उत्पीड़न खत्म हो जाने के बाद ही   असली आज़ादी कहलाएगी।

लेकिन आज देखा जा रहा है कि देश में भुखमरी के कारण करोड़ों बच्चे बेमौत मारे जा रहे हैं, करोड़ों लोग सड़कों पर रहने और कुपोषण के शिकार हैं, शिक्षा के निजीकरण से करोड़ों छात्र शिक्षा से वंचित होते जा रहे हैं,काम करने योग्य करोड़ों नौजवान बेरोजगार हैं, उत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में हर साल करोड़ों लोग बेमौत मारे जा रहे हैं।निरंतर बढ़ती गरीबी,महंगाई,आर्थिक विषमता सबको न्यूनतम इंसानी जरूरतों से वंचित कर रही है। आज देश में जातीय, लैंगिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक उत्पीड़न चरम पर चल रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का दमन-शोषण बढ़ता जा रहा है।

सरकार 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020' लागू कर सरकारी स्कूलों/ विश्विद्यालयों को दिए जा रहे सरकारी फण्ड को बंद कर उन्हें लोन दे रही है, उस लोन की भरपाई छात्रों -अभिभावकों से करने के लिए 400% से ज्यादा की फीस वृद्धि कर रही है।इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जो बेतहाशा फीस वृद्धि हुआ है वो देशविरोधी शिक्षा नीति का ही दुष्परिणाम है। सरकार मजदूरों के पुराने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड को लागू करते हुए स्थाई व सुरक्षित नौकरी के बजाय ठेके पर अल्प समय की नौकरी का "अग्निपथ योजना" जैसा कानून,8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम करवाने सहित विभिन्न मजदूर विरोधी कानून पारित कर देश के छात्रों- नौजवानों और मजदूरों के शोषण को बढ़ा रही है। देश के सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर पूंजीपतियों को मालामाल और करोड़ों जनता को बदहाल कर रही है।

ऐसे में भगत सिंह के कहे हुए एक एक शब्द आज बिल्कुल सच साबित हो रहे हैं और उनके क्रांतिकारी विचार आज ज्यादा प्रासंगिक हैं।इसलिए हम भगत सिंह के विचारों पर चर्चा व सभा कर रहे हैं।  नौजवानों को भगत सिंह के लेखों को पढ़ना और पढ़ाना चाहिए, भगत सिंह को जानबूझकर सिर्फ बम-बंदूक की छवि में दिखाने की परंपरा का हम विरोध करते हैं।हम मानते हैं कि भगत सिंह एक महान विचारक, दार्शनिक और हक की पढ़ाई और हक़ की लड़ाई को शानदार तरीके से लड़ने के हौसलों को बढ़ाने का काम करते हैं। भगत सिंह अपने विचारों,लेखों, पत्रों, जेल डायरी व दस्तावेजों में ज्यादा जिंदा हैं।
कार्यक्रम में अंजलि, दुखहरन ,प्रशान्त, संदीप,चंदन, विश्वजीत, विजय, अजय, दिनेश, अजित, आकाश, आलोक, अमन, सुजीत, उत्तम, श्रेय, राहुल, अभिषेक,तेज सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहें।

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