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स्व० रामप्यारे सिंह पूर्व पर्यावरण मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार की 16 वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।


उत्तर प्रदेश।

रिपोर्ट: वीर सिंह

उत्तर प्रदेश: प्रदेश के पर्यावरण मंत्री रहे रामप्यारे सिंह की आज 16 वीं पुण्यतिथि है। जिसके अवसर पर आमजनमानस अपने विकास पुरूष को श्रद्धांजलि दे रहा है। आज़मगढ़ स्थित सगड़ी विधानसभा के इतिहास में स्व० रामप्यारे सिंह का नाम आज भी स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं।
 सगड़ी विधानसभा में जगह जगह उनके नाम के शिलापट्ट उनके विकास की गाथा बयान कर रहे हैं। प्रदेश के पर्यावरण मंत्री रहे रामप्यारे सिंह सगड़ी तहसील क्षेत्र के अमूवारी गांव में साधारण किसान परिवार में पैदा हुए। उन्होंने जीयनपुर में कोटे की दुकान भी चलाई। अपने मिलनसार स्वभाव के कारण वह क्षेत्र में लोकप्रिय होते गए। रामप्यारे सिंह ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अजमतगढ़ ब्लाक के प्रमुख के रूप में शुरू की। 90 के दशक में वह सपा के पूर्व महासचिव अमर सिंह के संपर्क में आए और उनके काफी करीब हो गए। वर्ष 1992 में सपा के गठन के बाद वे मुलायम सिंह के साथ हो गए। रामप्यारे सिंह वर्ष 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए।  पार्टी ने वर्ष 2002 में सगड़ी विधानसभा से दोबारा टिकट दिया लेकिन रामप्यारे सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बसपा के मलिक मसूद से काफी कम मतों से हारे। चुंकि रामप्यारे सिंह अमर सिंह के चलते मुलायम सिंह के भी काफी करीबी हो गए थे। इसलिए हार के बाद भी उन्हें न केवल विधान परिषद भेजा गया बल्कि वर्ष 2003 में सपा मुखिया मुलायम सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में जगह देते हुए पर्यावरण मंत्री बनाया। इस बीच वे कैंसर से पीड़ित हो गए। ऐसे में छोटे पुत्र सर्वेश सिंह उर्फ सीपू ने राजनीतिक क्षेत्र में सक्रियता दिखाई। इसी बीच दो साल बाद रामप्यारे सिंह का 31 मई 2005 को निधन हो गया। पिता की राजनीतिक विरासत को छोटे पुत्र सर्वेश सिंह उर्फ सीपू ने संभाला। स्व.रामप्यारे सिंह की सगड़ी विधानसभा क्षेत्र में तैयार की गई राजनीतिक जमीन का फायदा सर्वेश को मिला। वर्ष 2007 में सर्वेश ने सपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। वर्ष 2010 में अमर सिंह सपा से अलग हुए और लोकमंच का गठन किया तो सीपू ने भी पिता के मित्र का साथ दिया और समाजवादी पार्टी छोड़ दी। अमर सिंह सीपू को पुत्र की तरह मानते थे जिसके कारण उन्होंने सीपू को लोकमंच में साथ रखने के बजाय वर्ष 2011 में बसपा में शामिल करा दिया। इसके साथ ही सर्वेश के बड़े भाई संतोष सिंह उर्फ टीपू भी बसपा में आ गए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा मुखिया मायावती ने सर्वेश सिंह सीपू को सदर विधानसभा व उनके बड़े भाई संतोष सिंह टीपू को सगड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ाया। उस समय सपा की लहर में दोनों भाई चुनाव हार गए और जिले की दस विधानसभा सीटों में से नौ पर सपा को जीत मिली। हारने के बाद भी सर्वेश सिंह सीपू अपने पिता की तैयार की हुई जमीन को संवारने में लगे रहे। इसी बीच 19 जुलाई 2013 को पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। पति की मौत के बाद वंदना सिंह राजनीति में सक्रिय हुई और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा मुखिया मायावती ने वंदना सिंह को सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे दिया। वंदना सिंह विधायक चुन ली गयी। वर्तमान में स्वर्गीय राम प्यारे सिंह की राजनीतिक विरासत को उनकी बहू वंदना सिंह और बड़े पुत्र संतोष सिंह टीपू संभाल रहे और भारतीय जनता पार्टी में रहकर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में क्षेत्र के विकास को नया रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। आज विकास पुरुष स्वर्गीय राम प्यारे सिंह की पुण्यतिथि पर पूरा क्षेत्र उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और याद कर रहा है। जिसने सगड़ी के विकास का नया कीर्तिमान स्थापित किया।

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