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पांच दिन से रिंग बांध में हो रहा था रिसाव।

आज़मगढ़।

सगड़ी।

ग्रामीणों की सूचना के के बाद भी नही दिया ध्यान।

रात्रि में बांध कटने की डर से पहरा दे रहे थे ग्रामीण।

सगड़ी  घाघरा की बाढ़ में जहाँ 134 गांव पूर्ण रूप से प्रभावित है वही अबतक 226 नावे लगाई गयी है, जबकि बाढ़ से एक लाख 26 हजार की आबादी प्रभावित है और लोग बांध पर शरण लेने को मजबूर है पर जिला प्रशासन से लेकर तहसील प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। वर्ष 2014 में तहसील प्रशासन ने 367 नाव लगा रखी थी।जबकि कागज के विपरीत 428 नाव लगभग लगाई गई थी जो लेखपालो ने खेल कर 367 नाव कर दी।

वर्तमान में नदी 1998 से मात्र 07 सेमी नीचे है और शाहडीह ,देवारा गरीब दुबे ,दाम महुला ,रोशनगंज, आदि रिंग बांध कट गए पर तहसील और जिला प्रशासन ने गौर किया होता तो रिंग बांध को बचाया जा सकता था ।पर ग्रामीणों की शिकायत सुनी नही गयी।यदि दाम महुला के ग्रामीणों की शिकायतों को संज्ञान में पांच दिन पूर्व ले लिया होता तो 200 घरो की बस्ती सड़क पर नही आती जबकि बाढ़ क्षेत्र में नाव ही एक सहारा है पर प्रधान तो परेशान है पर नाव नही लग पा रही है।ऊपर से राहत के नाम पर 25 केजी गेहू चावल दे तो दिया जाने का दावा प्रशासन कर रहा है पर बंट नही रहा है।

 200 से अधिक परिवार के लोग आफत में फंस गये हैं। कारण कि यहां दाम महुला रिंग बांध शुक्रवार की रात टूट गया। गृह सचिव के दौरे के दौरान बांध टूटने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों ने गांव छोड़ प्राथमिक विद्यालय दाम महुला में शरण लेने में लगे हुए है। गृह सचिव इस समय जीयनपुर कोतवाली का निरीक्षण कर रहे है। यहां से बंधा काफी करीब है। ऐेसे में माना जा रहा है कि वे मौके पर जा सकते है पर गए नही ।वहीं बांध टूटने से नाराज ग्रामीणों ने महुला गढवल बांध पर जाम लगाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्‍हें भगा दिया।वही महराजगंज और हरैया ब्लाक के 41 स्कूल बाढ़ में डूबे है ।जहाँ लगभग 5000 छात्र ककहरा भूल रहे है ।न तो एसडीएम और नही तहसीलदार ही नावों और वितरण की जानकारी दे पा रहे है। तहसील दार सगड़ी प्रेम प्रकाश राय ने कहा कि जानकारी नही है कंट्रोलरूम और आपदा को होगी। क्षेत्र में बाढ़ के चलते तीन दर्जन से अधिक गांव घाघरा की बाढ़ के चपेट में है। यहा बाढ़ से राहत को लेकर किये गए इंतजाम से स्‍थानीय लोग काफी नाखुश है। खुद भाजपा नेता व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाते रहे है। इसके बाद भी प्रशासन ने व्‍यवस्‍था में किसी तरह का सुधार नहीं किया। सवाल दाम महुला रिंग बांध का है यहां पिछले पांच दिनों से रिसाव हो रहा था। ग्रामीणों ने बाढ़ खंड के अधिकारियों से लेकर डीएम तक से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण खुद रिसाव बंद करने का प्रयास करते रहे और रात भर जाग कर पहरा देते रहे लेकिन असफल रहे। शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे बांध पानी का दबाव नहीं झेल सका और टूट गया। बांध टूटने से दाम महुला गांव के करीब 200 घर डूब गये। और 2000 एकड़ से ऊपर फसल डूब गई ।चारो तरफ हाहाकार बचा हुआ है। गांव के लोग रात में ही गांव छोड़कर पलायन कर गये लेकिन कोई प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों ने प्राथमिक विद्यालय में शरण ले रखी है। कुछ ग्रामीण इधर उधर अब भी भटक रहे है। दुर्व्‍यवस्‍था से नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को महुला गढवल बांध पर जाम का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्‍हें जाम नहीं करने दिया। मामले की जानकारी होने पर भाजपा नेता मनीष मिश्रा मौके पर पहुंच गये हैं। उनहोंने आरोप लगाया कि पांच दिन से प्रशासन से शिकायत की जा रही थी पर सुनी नही।अब जैसे वर्ष 2014 में बंधा कई जगह टूट गया था जो कभी भी टूट सकता है। प्रशासनिक व्यवथा से जहाँ ग्रामीणों में आक्रोश है वही प्रधान प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगा रहे है जबकि छोटी सरजू नदी पर बना सहनुपुर,और जोकहरा बांध पर दबाव बढ़ रहा है।जिससे खतरा हो सकता हैं।

रिपोर्ट- मनोज चतुर्वेदी
     जोन रिपोर्टर

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                         समाचार इंडिया लाइव
                             ब्यूरो आज़मगढ़

               

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