सगड़ी।
मुंशी प्रेमचंद जयंती पर हुई गोष्टी बच्चों को बांटी गई मिठाई।
आज़मगढ़। " मुंशी प्रेमचंद साहित्य सर्जक तो थे ही, उनके अंदर एक शिक्षक का व्यक्तित्व था, जिसमें उन्हें धनपत राय से मुंशी प्रेमचंद बना दिया। मुंशी प्रेमचंद की प्रासंगिकता आज के दौर में और बढ़ गई है, कभी वह गोरखपुर महानगर में स्थापित नॉर्मल स्कूल में डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल हुआ करते थे।
आजादी के संघर्षों में सन 1921- 22 के असहयोग आंदोलन को धार देने के लिए मोहनदास करमचंद गांधी घंटाघर चौराहे पर आए थे, और उन्होंने आव्हान किया था, की अंग्रेजी सरकार की हुकूमत के अधीन जो लोग भी सरकारी सेवाओं में हैं वह आजादी के संघर्ष में शामिल होने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे दें। उसी दिन मुंशी प्रेमचंद अपने घर वापस जाते हैं और अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, आज़ादी का दौर चल रहा था, उसके संघर्ष में जो नौजवानों का आंदोलन चल रहा था, गांधी का खुद अपना आंदोलन चल रहा था अपने तरीके से देश की आजादी की लड़ाई में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुंशी प्रेमचंद महात्मा गांधी से जुड़ गए थे, और उन्होंने उस जमाने में जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं हुआ करती थी।
लोगों की जुबान बंद थी लाल पगड़ी को देखकर लोग गांव छोड़कर भाग जाया करते थे। मुंशी प्रेमचंद ने कलम उठाई और अपनी कहानी के माध्यम से वर्तमान समय की स्थिति बयां कर दी, जिसको अंग्रेजी सरकार ने जब्त कर लिया और तलाश हुई कि इसका लेखक कौन है कहां रहता है। क्योंकि उसके अंदर जो उन्होंने बात लिखी थी आजादी के संघर्ष में जो हमारी भावनाएं थी जो हमारे भगत सिंह जैसे लोग गांधी का जो ख्वाब था देश को आजाद कराना है। उस मूल भावना पर उन्होंने एक विद्रोही भावना को दूसरे शब्दों में करवा कर अपना उद्देश्य पूरा किया था। लमही छोटे से परिवार में पैदा हुआ लोगों के आम जनता की आवाज को शब्दों के माध्यम से उनकी बात आज तक इस पूरे दुनिया में घूमती है।
उक्त बातें जिला कांग्रेस कमेटी महासचिव एवं जनहित संघर्ष समिति के संयोजक ओमप्रकाश राय ने मुंशी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सगड़ी तहसील अंतर्गत गांधी इंटर कॉलेज मालटारी आजमगढ़ एवं नदौरा तालुका मुहम्मद पुर दलित बस्ती में आयोजित आम जनता के बीच मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहीं, साथ ही मुंशी प्रेमचंद के बारे में बताया और छोटे-छोटे बच्चों के बीच में मिठाइयां भी बांटी ताकि उनके चेहरे पर हंसी खुशी हो।
इस मौके पर सेवाती, फुला, हैदरा, फूलचंद, केवल, सतिराम, सुषमा, शकुंतला, पूनम, बालेदिन , राजकुमार, रमेश, रामनाथ, रामकरन, चकुई, मूरति, बबिता, सूर्यनाथ, नागेंद्र, राघवेंद्र,आदि लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट: वीर