आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 26 अगस्त-- क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी ने अवगत कराया है कि हाॅकी के जादूगर स्व0 मेजर ध्यानचन्द जी के जन्म दिवस (29 अगस्त) के अवसर पर आयोजित होने वाले खेल कार्यक्रम के सम्बन्ध में प्रदेश में खेल विभाग द्वारा खेल कार्यक्रमों के विकास एवं खिलाड़ियों के खेल में निखार लाने के लिए समुचित अवसर प्रदान करने के दृष्टिकोण से विविध योजनायें कार्यान्वित की जा रही हैं। खेल विभाग द्वारा इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आवश्यक अवस्थापना सुविधायें यथा- स्टेडियम, बहुउद्देशीय क्रीड़ा हाल, तरणताल, बैडमिन्टन, टेनिस कोट, वॉलीबाल कोर्ट, जिम्नेजियम हाल, हॉकी, फुटबाल, कबड्डी, कुश्ती जैसे खेलों के लिए खेल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक आदि सुविधायें प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सृजित की जा रही है। इन योजनाओं के फलस्वरूप प्रदेश में क्रीड़ा प्रतिष्ठानों की उपलब्धता और खिलाड़ियों को अन्य खेल सुविधायें उपलब्ध कराने के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है।
प्रशिक्षण, प्रतियोगिता एवं अन्य योजनाओं के संचालन हेतु खेल विभाग अपने सहयोगी विभागों, शिक्षा विभाग, युवा कल्याण विभाग स्वायत्तशासी खेल संघों तथा अन्य खेल आयोजकों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाता है। प्रशिक्षण योजनाओं में खेल छात्रावास तथा स्पोर्ट्स कालेज परिणामजनक योजनायें हैं। इन योजनाओं में अधिक से अधिक प्रतिभाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आवासीय क्रीड़ा छात्रावासों एवं स्पोर्ट्स कालेजों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ीगण इन सुविधाओं का समुचित उपयोग कर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश व देश का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। खेल विभाग प्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजनात्मक योजनाओं से नहीं जुड़ा है फिर भी बड़े पैमाने पर खेल अवस्थापनाओं के सृजन की प्रक्रिया में समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के लिए भारी संख्या में रोजगार दिवसों का सृजन भी होता है। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान करने तथा भूतपूर्व खिलाड़ियों को पेंशन प्रदान करने हेतु खेल विभाग कटिबद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के विशिष्ट खिलाड़ियों को लक्ष्मण/रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित करने की भी योजना है।
प्रशिक्षण शिविर खेल विभाग का मेरूदण्ड है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए खेल विभाग द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लोकप्रिय खेलों का प्रशिक्षण शिविर संचालित करने हेतु पूरे वर्ष एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया जाता है, जिस जनपद में विभागीय प्रशिक्षक खेल विशेष के उपलब्ध नहीं होते हैं, वहां पर मानदेय प्रशिक्षकों द्वारा शिविरों का संचालन कराया जाता है, जिनको उनकी योग्यता के अनुसार भुगतान किया जाता है। प्रशिक्षण शिविर में खिलाड़ियों का पंजीकरण शुल्क रू0 60 एकमुश्त एक वर्ष हेतु लेकर उन्हें उपकरणों सहित पूर वर्ष निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी एवं एनआईएस स्तर के प्रशिक्षकों को रू0 30000 प्रतिमाह, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी प्रशिक्षक को रू0 27000 प्रतिमाह, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी प्रशिक्षक को रू0 25000 प्रतिमाह, एनआईएस/एनएनआईपीई डिप्लोमा खिलाड़ी प्रशिक्षक को रू0 25000 प्रतिमाह राज्य स्तर/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर (जूनियर वर्ग) के खिलाड़ी प्रशिक्षक को रू0 20000 प्रतिमाह अंशकालिक मानदेय दिया जायेगा।
विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों के संचालन स्वरूप जो बच्चे सामने आते हैं उनको प्रतिस्पर्धा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त जनपदों में विभिन्न खेलों की जिला तथा प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाता है। इस हेतु विभाग द्वारा पूरे वर्ष का एक कार्यक्रम तैयार किया जाता है। राष्ट्रीय पर्व एवं राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित प्रतियोगितायें, सब-जूनियर (बालक/बालिका वर्ग), जूनियर (बालक/बालिका वर्ग), महिला खेल प्रतियोगितायें, आमंत्रण राज्य/राष्ट्रीय प्रतियोगितायें आयोजित होती हैं।
खेल विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक योजना आवासीय क्रीड़ा छात्रावास है। जिसके अन्तर्गत 12 वर्ष एवं 15 वर्ष तक के खिलाड़ियों को जिला एवं मण्डल स्तर से प्रदेश स्तर पर चयन करके खिलाड़ियों का 15 दिवसीय केन्द्रिय प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जाता है। इस योजना के अन्तर्गत खेल विशेषज्ञों की समिति द्वारा खिलाड़ियों का चयन करके विभिन्न खेल के छात्रावासों में बालक/बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है। जहाँ पर निःशुल्क आवासीय, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा, खेल किट, खेल उपकरण, प्रशिक्षण आदि की सुविधा प्रदान की जाती है। इसी प्रकार स्पोर्टस कालेज में 09 से 12 वर्ष तक के खिलाड़ियों को खेल विशेषज्ञों की समिति द्वारा मण्डल स्तर से प्रदेश स्तर पर चयन करके खिलाड़ियों को कक्षा-6 में प्रवेश दिया जाता है। जहाँ उन्हें निःशुल्क आवासीय, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा, खेल किट, खेल उपकरण, प्रशिक्षण आदि की सुविधा प्रदान की जाती है तथा कक्षा-6 से इण्टरमीडिएट तक शिक्षा प्रदान की जाती है।
उत्तर प्रदेश खेल विकास एवं प्रोत्साहन समिति वर्ष 1984 की जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति को अतिक्रमित करते हुए उत्तर प्रदेश खेल विकास एवं प्रोत्साहन समिति नियमावली 2020 प्रख्यापित की गयी है तथा जिसका समस्त कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश में रहेगा। उत्तर प्रदेश खेल विकास एवं प्रोत्साहन समिति के उद्देश्य एवं लक्ष्य निम्नवत् है जिसके अन्तर्गत खेल संस्कृति का समस्त वर्गी यथा-महिलाओं, दिव्यांगजन इत्यादि में बढ़ावा देना, खेलों का विस्तार एवं प्रतिभागिता प्रतिशत बढ़ाना, खेल प्रतिभाओं का चिन्हीकरण एवं बहुमुखी क्षमता विकास करना है, जिससे वह चयनित खेल में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में उत्कृष्टता प्राप्त करें। खेल अवस्थापनओं, उपकरणों, भौतिक संरचना एवं मानव संसाधनों का इन्वेंटाइजेशन करना, जिससे संसाधनों का प्रयोग बढ़े। एक सुनियोजित ढंग से प्रशिक्षण व क्षमता विकास आधुनिक टेस्टिंग, मानकों/मनोवैज्ञानिक प्रचार-प्रसार व तकनीकी के माध्यम से किया जायेगा। सभी सम्बन्धित घटकों, खेल संघों/संस्थाओं, विभागों यथा-युवा कल्याण, शिक्षा समाज कल्याण, महिला कल्याण, स्वास्थ्य, नगर विकास, उद्योग, सेना, रेलवे, सार्वजनिक उपक्रम, स्वयंसेवी संस्थाएं आदि के मध्य समन्वय रखते हुए खेलों का समग्र विकास करना है।