आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
कोरोना महामारी से टीकाकरण तक मजबूत से खड़े रहे योद्धा।
समुदाय की सुरक्षा में एएनएम, आशा व संगिनी का दिखा उत्साह
आजमगढ़ – 26 मार्च 2021: कोरोना महामारी के दौर में कोरोना वॉरीयर्स (योद्धाओं) ने अपनी जान की बाजी लगा कर कोरोना संक्रमण को हराने और संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए आशा/आशा संगिनी, एएनएम ने कड़ी मेहनत की है| कोरोना योद्धाओं में अगर कोई जमीनी स्तर पर काम करके निकला है तो उनमें सबसे आगे की पंक्ति में आशा कार्यकर्ता, आशा संगिनी व एएनएम शामिल है | लॉकडाउन के दौर से कोविड-19 टीकाकरण में भी एक बेहद अहम कड़ी के रूप में देश के प्रति सच्ची सेवा भाव के साथ अपना कर्तव्य निभा रही हैं।
कोरोना योद्धा के प्रथम पंक्ति में खड़ी अतरौली ब्लॉक की आशा संगिनी कंचन पांडे बताती हैं कि लॉकडाउन के बाद सरकार के सभी आदेश का पालन करते हुये काम किया। उनके क्षेत्र में अठारह आशा कार्यकर्ता आती हैं जिनकी वह समय-समय पर मॉनिटरिंग करती हैं | वह कहती हैं कि मैं अपनी टीम के साथ लॉकडाउन के दौरान मलिन बस्ती व ग्रामीण क्षेत्र में राशन वितरण का काम की, गर्भवती, बुजुर्गों व बच्चों व जरूरत मंद व्यक्तियों को दवा उनके घर जाकर देती थी | बाहर से आ रहे। लोगों का स्क्रीनिंग व जांच करने का काम किया । घर-घर जा कर लोगों को कोविड नियमों के पालन के प्रति जागरूक किया।
इस दौरान बच्चों की ज़िम्मेदारी मेरे पति ने निभाई । पति ने कहा कि यह काम भगवान की पूजा के समान है और उन्होने हमेशा अपनी पत्नी का साथ दिया और आगे भी देंगे | लॉकडाउन के बाद मई माह से अब तक मेरी टीम द्वारा 278 गर्भवती का पंजीकरण, 349 प्रसव और 9 से 12 माह व 16 से 24 माह एवं 2 से 5 वर्ष के 696 बच्चों का टीकाकरण व जांच करवा चुकी हैं। कोविड टीका के लिए लोगों को जागरूक कर 60 वर्ष से ऊपर वालो के 70 से ज्यादा लोगों का टीकाकरण करवायी। साथ ही आयुष्मान भारत के तहत गोल्डेन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए ब्लॉक स्तरीय लगे कैंप पर 235 लोगों की गोल्डेन कार्ड बनवाने में मदद की ।
कोरोना योद्धा का दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ ब्लॉक पल्हनी की एएनएम
शशि प्रभा राय ने बताती हैं कि स्थानीय प्रशासन द्वारा लॉकडाउन से
अब तक जिन कार्यों की ज़िम्मेदारी हमे दी जाती है, वह उसे पूरा करने का पूरा प्रयास करती हैं । इस काम से मेरा परिवार भी बहुत खुश है। परिवार के सहयोग से ही लॉकडाउन के दौरान मैं लोगों की सेवा कर सकी। लॉकडाउन में लोगों की परेशानी को देख कर अपने घर–परिवार की चिंता नहीं की, सुबह आठ बजे से ही केंद्र चली जाती थी। बाहर से आ रहे लोगों को 14 दिन का कोरेंटाइन व उनकी सूची तैयार की,लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर बी.पी व शुगर के मरीजों को दवा उनके घर तक पहुंचाई। अब लोगों को कोविड टीकाकरण के लिए जागरूक कर रही हूँ । अब तक 648 लोगों को कोरोना का टीका लगा चुकी हूँ| लॉकडाउन से अब तक 212 गर्भवती के साथ ही 9 से 12 माह व 16 से 24 माह के 374 बच्चों को कई बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगा चुकी हैं |
जिला कम्यूनिटी प्रोसेस प्रबंधक(डीसीपीएम) विपिन पाठक ने बताया वर्तमान समय में जिले में 3650 आशा ,105 संविदा एएनएम एवं 340 रेगुलर , साथ ही जिले में उपकेंद्र 493 के साथ , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 28 व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 70 एवं 4 जिला चिकित्सालय सेवा दे रहे है।
लॉकडाउन के दौरान आशा/आशा संगिनी व एएनएम कार्यकर्ता शहरी, ग्रामीण मलिन बस्ती के घर-घर जाकर व बहार से आ रहे लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग करने का कार्य किया | लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के साथ ही घर के प्रत्येक सदस्य का बुखार, सर्दी, ख़ासी की जांच व जांच में पॉज़िटिव लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाना, होम आइसोलेशन के लोगों का प्रतिदिन निगरानी करने का कार्य बखूबी किया।
उन्होने बताया कि लॉकडाउन के दौरान और अनलॉक प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी कुपोषण एवं मातृ-शिशु मृत्यु दर की रफ्तार कम करने की ज़िम्मेदारी भी आशा, संगिनी व एएनएम पर ही थी। कोविड टीकाकरण केंद्र पर टीका लगाने की ज़िम्मेदारी भी निभा रही हैं। साथ ही आयुष्मान भारत योजना का गोल्डेन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए ब्लॉक स्तरीय लगे कैंप में सूची तैयार करने का कार्य भी कर रही हैं।