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जिसका मन किसी से भी प्रभावित नहीं होता उसे योग कहते हैं: डॉ प्रशांत कुमार राय योगाचार्य

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: डॉक्टर प्रशांत कुमार राय सहयुक्त आचार्य योगाचार्य श्री गांधी पीजी कॉलेज मलतारी ने आज योग दिवस पर कहा कि- मन को जिन चीजों में आनंद आता है उसे कहते हैं भोग, और मन को जिन चीजों से दुख मिलता है उसे कहते हैं रोग, और जिसका मन किसी से भी प्रभावित नहीं होता उसे कहते हैं योग।
 उन्होंने बताया कि योग के मुख्यतया दो स्वरूप हैं प्रकृति स्वरूप और चैतन्य स्वरूप।
 यदि शरीर के लिए देहात्मभाव करते हैं तो प्रकृति जन्य है जो कि निम्न कोटि का है, यदि चेतना के स्तर पर करते हैं जैसा कि महर्षि पतंजलि कहते हैं कि चित्त की वृत्तियों पर नियमन कर अपने स्वरूप को जानने के लिए ही उच्च कोटि का योग है।
उन्होंने कहा कि योग दिवस किसी एक दिन का दिवस नहीं बल्कि पूरे जीवन शैली का नाम है।
योग जीने का नाम है योग करने का नाम नहीं है योग को संपूर्णता के साथ लेना है, अष्टांग मार्ग को ध्यान में रखते हुए योग करते हैं, योग का परम लक्ष्य है अपने स्वरूप में स्थित हो जाना।

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