आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 23 मार्च-- उपायुक्त श्रम रोजगार मिथिलेश कुमार तिवारी ने बताया कि मनरेगा योजनान्तर्गत मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी व अन्य सामग्री अथवा सर्विस की आपूर्ति हेतु मनरेगा कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़े पदाधिकारी/कर्मी (क्षेत्र पंचायत प्रमुख, खण्ड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, सहायक लेखाकार, कम्प्यूटर ऑपरेटर व ग्राम रोजगार सेवक) के पारिवारिक सदस्यों व रिश्तेदारों द्वारा स्थापित फर्म/कम्पनीज को वेन्डर के रूप में रजिस्टर नहीं किये जाने की व्यवस्था प्रदत्त की गयी है। इस सम्बन्ध में परिवार/सम्बन्धी का तात्पर्य जिला पंचायत सेवा नियमावली-1970 के पैरा-54 के अनुसार पिता, पितामह, श्वसुर, चाचा या मामा, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा या भांजा, सगा चचेरा या ममेरा भाई, पत्नी का भाई और बहनोई, पति, पति का भाई, पति की बहन, पत्नी की बहन, पत्नी, पुत्री, पुत्रवधू, बहन, भाभी जो भाई या सगे चचेरे या ममेरे भाई की पत्नी हो, माता, सास, चाची या मामी से है।
उक्त के सन्दर्भ में जिला मजिस्ट्रेट/जिला कार्यक्रम समन्वयक आजमगढ़ द्वारा यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि योजनान्तर्गत चिन्हित कार्यदायी विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी एवं समस्त खण्ड विकास अधिकारी/कार्यक्रम अधिकारी से यह अपेक्षित है कि अपने कार्य क्षेत्र के अन्तर्गत पंजीकृत वेन्डर का उपर वर्णित निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में शत-प्रतिशत सत्यापन/निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पंजीकृत वेन्डर का कोई भी पारिवारिक सदस्य योजना से आच्छादित कार्मिक व ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत स्तर के प्रतिनिधि के सगे-सम्बन्धी नहीं है। मामले में कहीं भी उक्त प्रकृति की पुष्टि पाये जाने की दशा में उक्त वेन्डर को संसूचित करते हुए पंजीयन से तत्काल हटवाना सुनिश्चित करें। यह स्पष्ट किया जाता है कि भविष्य में शासनादेश में वर्णित व्यवस्था के विपरीत वेन्डर पंजीयन की स्थिति की दशा में सम्बन्धित के विरूद्ध कठोर कार्यवाही के साथ-साथ वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।