आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
जब समय का तमाचा पड़ता है न साहब तो कोई फकीर कोई बादशाह बन जाता है।
आज़मगढ़: सगड़ी तहसील क्षेत्र के सरगहा गांव निवासी झिनकू राम अपने बेटे के मृत्यु के बाद गांव में ही एक छोटी सी गुमती डालकर अपना जीवन यापन करते हैं। गुमती में भरे सामानों को देखकर आप इनके संघर्षशील जीवन का अंदाजा लगा सकते हैं।
इनकी मुख्य आमदनी का स्रोत ये गोमती ही है, बरहाल बेटे की मौत से पहले कोलकाता में करोड़ों का कारोबार था। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। हमने उनसे उनके जीवन के संघर्षों की बात की। तो उन्होंने बताया कि सुबह 5:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक हर रोज अपनी इस दुकान को खोलकर ग्राहकों का इंतजार करते हैं। उन्होंने अपने जिंदगी के अनुभव को हमसे साझा करते हुए बताया कि गरीबी और लाचारी बहुत कुछ करवाती है साहब। गरीब का दर्द हर कोई नही समझ सकता।
एक गरीब व्यक्ति बड़ा लाचार व विवश होता है। वह अपना जिंदगी लाचारी और विवसता में जीने के लिए मजबूर रहता है। अपने अभावग्रस्त जीवन में चलते-फिरते लोगों की झिड़क सुननी पड़ती है। झिड़क सुनकर कभी तिलमिला जाता है। कभी अपनी लाचारी को अपने दामन में छिपा कर मुस्करा कर रह जाता है। कभी अपनी गरीबी को कोसता है। ऐसे में खुद को ही दोषी पाकर शांत हो जाता है यह हाल है गरीबी का साहब।