आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
मंदिर परिसर में उनकी समाधि बनी है।
आज़मगढ़: सगड़ी तहसील क्षेत्र के चललालचंद स्थित बाबा चौमुखी नाथ मंदिर का नाम लिया जाय और कन्हई साधु को याद नहीं किया जाए तो शायद ही बाबा चौमुखी नाथ उस भक्ति की आराधना स्वीकार करे।
आपको बता दें कि मंदिर के ही समीप गढ़वल गांव निवासी कन्हई साधु थे। जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन काल बाबा चौमुखी नाथ की सेवा की। ग्रामीणों ने बताया कि कन्हई साधु बहुत ज्ञानी सन्त थे। उनका कहा कभी भी असत्य नहीं हुआ करता था। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले ही कह दिया था कि जब उनकी मृत्यु हो तब उनको सनातन संस्कृति के अनुसार जलाया ना जाए। बल्कि मंदिर परिसर में ही किसी जगह उनकी समाधि बना दी जाए। लोगों बताते हैं कि कन्हई साधु जीवन भर चौमुखी नाथ के शरण में ही रहना चाहते थे और मृत्यु के बाद भी यही चाहते थे कि उनका शरीर भी चौमुखी नाथ में ही रहे। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले ही निश्चय कर लिया था कि उनकी समाधि चौमुखी नाथ मंदिर के इर्द-गिर्द ही बनाई जाए और ग्रामीणों ने ऐसा ही किया।