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डीह मंदिर का पुनर्निर्माण कर पिता के सपनों को किया साकार।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर

आज़मगढ़: कहा जाता है कि पिता की विरासत पुत्र ही संभालता है और वही उस पर राज करता है लेकिन इस जमाने में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पिता की विरासत के अलावा पिता के सपनों को साकार करने का प्रयास करते हैं और ऐसा ही एक सपना लेकर चल रहे सगड़ी तहसील क्षेत्र के चकलालचंद निवासी खदेरू गुप्ता जिन्होंने गांव में डीह का स्थान जो जर्जर हो चुका था उसको बनवाने का प्रयास किया लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी ही रह गई और ईश्वर ने उन्हें अपने पास बुला लिया और फिर यह मंदिर अधूरा ही रह गया। लेकिन पिता के सपनों को साकार करने की एक सोच लिए मुंबई से अपने गांव आए मिथिलेश गुप्ता ने गांव के बच्चों के साथ मिलकर इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया जिसके बाद गांव के लोगों ने खुशी जताई है।

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