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उत्तर प्रदेश में विधायकों के काम नहीं आया दलबदल करना।

लेख।

 21 में से 17 को चुनाव में मिली हार

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लेख: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजे  भारतीय जनता पार्टी के लिए तो खुशखबरी लाए, लेकिन चुनाव से ऐन पहले दलबदल करने वाले ज्यादातर विधायकों का दांव खाली गया। ऐसे करीब 80 प्रतिशत जनप्रतिनिधि सियासी संग्राम में सफलता हासिल नहीं कर सके। दलबदल कर विभिन्न राजनीतिक दलों का हाथ थामने वाले इन 21 विधायकों में से सिर्फ चार को ही जीत नसीब हुई है। पाला बदलने वाले इन विधायकों में से 9 भाजपा जबकि 10 सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे। दो विधायकों ने क्रमशः अपना दल (एस) व वीआईपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

जिन प्रमुख नेताओं को हार का सामना करना पड़ा उनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य व धर्म सिंह सैनी के अलावा बरेली की पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन शामिल हैं। ये नेता चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे।
 
अदिति सिंह (रायबरेली), अनिल कुमार सिंह (पुरवा) और मनीष कुमार (पड़रौना) ने दलबदल के बाद भाजपा के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की। जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री रहे दारा सिंह चौहान ने चुनाव से ठीक पहले सपा का हाथ थामा व घोसी सीट से विजयी रहे।
 
अदिति सिंह ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया था। हालांकि राकेश सिंह भाजपा के टिकट पर रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली हरचंदपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल करने में विफल रहे।

उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन ने 273 सीट जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) नीत गठबंधन ने 125 सीट पर जीत हासिल की है।

दलबदल के बाद जिन विधायकों ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत नहीं सके उनमें राकेश सिंह (हरचंदपुर), नरेश सैनी (बेहट) वंदना सिंह (सगड़ी), रामवीर उपाध्याय (सादाबाद), सुभाष पासी (सैदपुर) और हरिओम यादव (सिरसागंज) शामिल हैं।

पाला बदलकर सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत से वंचित रहे विधायकों में ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी) रौशन लाल वर्मा (तिहर), भगवती सागर (घाटमपुर), दिग्विजय नारायण (खलीलाबाद), माधुरी वर्मा (नानपारा) और विनय शंकर त्रिपाठी (चिल्लूपार) शामिल हैं।

वहीं, रामपुर की स्वार सीट पर कांग्रेस का टिकट ठुकराकर भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन में अपना दल (एस) से चुनाव मैदान में उतरे नवाब परिवार के हैदर अली खान को सपा उम्मीदवार आजम खान ने 61 हजार मतों से हराया।

वही बैरिया क्षेत्र में 2017 में भाजपा से चुनाव जीते सुरेंद्र सिंह इस बार टिकट नहीं मिलने पर विद्रोह कर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें तीसरे नंबर पर धकेल दिया।

लेख: मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता 
बापू स्मारक इंटर काॅलेज दरगाह मऊ।

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