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बच्चे का लू और गर्मी से करें बचाव, रहें सतर्क - डॉ सुमन

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

शिशु की पहली गर्मी है, तो रखें ज्‍यादा ध्यान  

आजमगढ़ : किसी के लिए भी गर्मी को बर्दाश्त करना आसान नहीं होता है, और बच्‍चों के लिए तो गर्मियों का मौसम कुछ ज्‍यादा मुश्किल भरा साबित होता है। वहीं अगर शिशु की पहली गर्मी है, तो उसे ज्‍यादा संभलकर रहने की जरूरत होती है। यह कहना है जिला महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ शैलेश कुमार सुमन का। 
डॉ सुमन ने बताया कि इस बार की गर्मी में लू लगने, घमोरियों और त्‍वचा से जुड़ी कई परेशानियों के अब तक 56 से ज्यादा  नवजात शिशु का इलाज किया गया है। गर्मी में शिशु के माता पिता की जिम्‍मेदारी और भी बढ़ जाती है, शिशु की देखभाल में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यदि बच्चे कि पहली गर्मी है तो उसकी देखभाल करने और गर्मी से बचाने के लिए किन चीजों का उपयोग कर सकते हैं, इस बात की जानकारी होना बेहद जरूरी है। 

गर्मी में नवजात शिशु में होने वाली बीमारी–

 बुखार,पीलिया,दस्त,फंगल इंफेशन तथा आँखों का इंफेशन इत्यादि। एहतियात के तौर पर बच्चे की आँखों में काजल न लगायें तथा शिशु को कम से कम लोगों को स्पर्श करने दें।     
डॉ शैलेश ने बताया कि गर्मी में शिशु को छ: माह तक सिर्फ माँ का ही दूध पिलायें।  शिशु को सूती और ढीले कपड़े पहनाएं ,क्‍योंकि इससे बच्‍चे की त्वचा सांस ले पाती है तथा  घमोरी होने पर भी आराम मिलता है। धूप के समय शिशु को घर से बाहर न निकालें। 6 महीने से कम उम्र के शिशु को धूप में निकालते हैं, तो उसकी त्वचा को सीधा नुकसान पहुंच सकता है।  बाहर जाना भी पड़ रहा है तो शिशु के सिर पर सूती कैप पहनाकर रखें और धूप के सीधे संपर्क में न आने दें।  
गर्मी में शिशु को कुछ देर के लिए बिना नैपी के रखें। सूती नैपी या डिस्‍पोजेबल नैपी शिशु को इस मौसम में गर्म रख सकता है। जिससे बच्‍चे को पसीने की वजह से जांघों और पेट पर रैशेज (लाल दाने) हो सकते हैं। बच्चे की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें, बच्चा स्वस्थ है तो नियमित एक बार जरूर नहलायें।  दिन में कम से कम दो बार शिशु के कपड़े जरूर बदलें। टैलकम पाउडर त्वचा से नमी को सोखता है और गर्मी के मौसम में शिशु की त्वचा को ड्राई करता है।  नैपी बदलते समय शिशु की जांघों पर और नहलाने के बाद भी इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं। गर्मी के मौसम में शरीर से पानी को खींच लेता है और शरीर में डिहाइड्रेशन पैदा कर देता है।  नवजात शिशु सिर्फ मां का दूध पीते हैं और उन्‍हें इससे पोषण और हाइड्रेशन मिलता है।
शिशु को हाइड्रेट रखने के लिए उसे थोड़ी-थोड़ी देर में दूध पिलाती रहें। पसीना आने से बच्‍चे के शरीर से फ्लूइड्स निकल जाते हैं। इसलिए इस मौसम में ब्रेस्‍ट मिल्‍क से शिशु को हाइड्रेट रखें।

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