आज़मगढ़।
आजमगढ़: जनपद में कुछ इण्टरमीडिएट स्तर के विद्यालय और महाविद्यालय शिक्षा के हब हुआ करते थे। जिसमें 1917 में स्थापित स्मिथ इंटर काॅलेज अजमतगढ, गांधी इंटर काॅलेज मालटारी, गांधी डिग्री काॅलेज मालटारी, वेसली इंटर काॅलेज आजमगढ़, शिबली नेशनल इंटर काॅलेज, शिबली डिग्री काॅलेज, नेशनल इंटर काॅलेज, कोइलसा इंटर काॅलेज, और कोइलसा डिग्री काॅलेज जनपद के नामी गिरामी संस्थान रहे हैं। जनपद के होनहार विद्यार्थी इन शिक्षण संस्थानों से निकलते रहे हैं और विविध सेवाओं में उच्च पदो पर पहुंच कर जनपद का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशनगर्द करते हैं। परन्तु दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य हैं कि- जनपद में नालन्दा बोध गया तक्षशिला और विक्रमशिला सरीखे ये शिक्षण संस्थान लगभग हर दल की सरकारों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की घनघोर उपेक्षा का शिकार हैं। इस घनघोर उपेक्षा का शिकार होने के कारण कुछ शिक्षण संस्थान तो येन केन प्रकारेण अपनी गरिमा बनाए हुए हैं परन्तु अधिकांश शिक्षण संस्थान इस दौर में विधवा विलाप कर रहे हैं। बदलते दौर के लिहाज से इन शिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण होना चाहिए था। अवसर की संभावनाओ को देखते हुए इन शिक्षण संस्थानों में अत्याधुनिक विषयों को शामिल किया जाना चाहिए था और अत्याधुनिक विषयों का पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह भी एक कडुवी सच्चाई है कि- इन सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों को इस दौर में निर्वाचित होने वाले सांसद और विधायक अपनी सांसद और विधायक निधि से एक ठेला पैसा भी नहीं देते हैं। इन शिक्षण संस्थानों के कायाकल्प का मुद्दा इस उप चुनाव में अवश्य उठना चाहिए। हर चट्टी चौराहे पर जातिगत समीकरणों पर बहस करने के बजाय आजमगढ़ के हर जागरूक मतदाता को इन शिक्षण संस्थानों के कायाकल्प के मुद्दे पर बहस करना चाहिए। मतदाताओं की सार्थक बहस का दबाव सरकार और जनप्रतिनिधियों पर अनिवार्य रूप से पडता है। जनपद के सभी सरकारी अर्द्ध सरकारी और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में हाइटेक लाइब्रेरी और वाचनालय होना चाहिए। जिससे विविध प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को सहायता मिल सकें।
लेखक: मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता
बापू स्मारक इंटर कॉलेज दरगाह मऊ।