आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
आजमगढ़ 16 जून-- मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 वीरेन्द्र सिंह ने सभी पशुपालकों को अवगत कराया है कि इस समय सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश मे गर्म हवाए/लू का प्रकोप व्याप्त है, जिससे तापमान काफी बढ़ गया है। इस अवस्था मे उचित प्रबंधन से पशुओं को लू से बचाना अति आवश्यक है। गर्म हवाएं/लू के प्रभाव से पशु की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है, इसके साथ ही उचित देख-रेख एवं प्रबंधन न होने से पशु की बीमारी होने से मृत्यु भी हो सकती है। पशुपालन जीविका का साधन है। अतएव यह आवश्यक है कि गर्म हवाएं/लू से बचाव हेतु पशुपालकों को चाहिये कि पशुआें को सीधे धूप वाले स्थान मे न रखें। चरायी हेतु प्रातः एवं सायं काल ही भेजे। विशेष तौर पर 10 से 4 बजे के बीच सूर्य के ताप से पशुओं को बचाए, उन्हे खुले स्थान/धूप मे न खड़ा करें। पशुओ को ऊपर से ढके हुए छप्पर, टीन शेड वाले स्थानो मे रखे तथा यह विशेष ध्यान रखे कि रोशनदान, दरवाजो एवं खिड़कियों को टाट/बोरे से ढ़क दें, जिससे सीधे हवा का झोंका पशुओ तक न पहुंच सके तथा टाट/बोरे पर पानी का छिड़काव करते रहे। पशुओ को छाया मे बांधे और उन्हे पर्याप्त मात्रा मे पानी/तरल पदार्थ पिलाए। पशुओ को खली, दाना, चोकर, नमक एवं गुड़ के साथ संतुलित आहार दें। धूप मे ज्यादा देर तक रखा पानी पशुओं को न पिलायें, बल्कि ताजा व स्वच्छ पानी पिलायें। लू से प्रभावित पशु मे बुखार के लक्षण होते हैं, उसे तत्काल निकटवर्ती पशु चिकित्सक को दिखाकर सलाह ले और परामर्श का पूर्ण रूप से पालन करे। पशुओ को दिन मे एक बार अवश्य नहलायें। घर के बाहर छायादर स्थानो पर कटोरे मे पानी भरकर रख दे, जिससे अन्य पक्षी भी पानी पी सके।
तापमान बढने से सिंचाई के अभाव मे चरी के सूखने एवं जहरीली होने की प्रबल सम्भावना रहती है। जहरीली चरी खाने से पशुओ की मृत्यु हो सकती है। अतः सिंचाई के अभाव मे सूखी चरी पशुओ को कदापि न खिलाएं। परंतु यदि विषाक्तता की स्थिति दिखाई पडे़ तो तत्काल पानी पिलाकर जीवन रक्षा का प्रयास करें, तत्पश्चात निकटतम पशुचिकित्सक से सम्पर्क करें। पशु चिकित्सालयों पर जीवन रक्षक औषधिया उपलब्ध हैं।
इस समय गला घोंटू का टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है, पशुपालन विभाग द्वारा घर-घर जाकर निःशुल्क टीकाकरण दिनांक 01 जून 2022 से 31 जुलाई 2022 तक किया जायेगा। गला घांटू एक जीवाणुजनित रोग है। बीमारी के प्रमुख लक्षण- पशु को अत्यधिक बुखार (105-107 डिग्री फारेनहाइट) हो जाता है, चारा छोंड देता है, मुह से लार गिरने लगती है, गला सूज जाता है, सांस लेने मे बहुत परेशानी होती है, पशु जीभ निकालकर घुर्र-घुर्र की आवाज करने लगता है और यदि समय से इलाज न मिले तो पशु की मृत्यु हो जाती है। इसलिए सभी पशुपालको से अपील है कि टीकाकरण मे सहयोग करें एवं अपने पशुओ को टीका अवश्य लगवाये। टीकाकरण से कोई भी पशु वंचित न रहने पाये। यह बीमारी जुलाई से अगस्त मे अधिक होती है। अतः सभी पशुपालको से अनुरोध है कि मानसून आने से पूर्व गलाघोंटू बीमारी से बचाव का टीका अपने पशु को अवश्य लगवाये। यह टीका भी निःशुल्क लगाया जाता है।
किसी भी आपातकालीन स्थिति या अधिक जानकारी के लिए पशुपालन विभाग के कंट्रोल रूम नम्बर-18001805141 या नजदीकी पशु चिकित्सालय पर सम्पर्क अथवा डा0 वीरेंद्र सिंह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के मो0 नंबर- 9450616986 पर संपर्क करें।