मकान के पानी बहने के विवाद में वृद्धा से मारपीट का मामला, अदालत ने 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
आजमगढ़। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी के बाद महराजगंज थाना क्षेत्र में गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। विशेष पॉक्सो/गैंगस्टर कोर्ट, आजमगढ़ ने अजय मौर्या और सुशीला देवी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 55-55 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
पुलिस के अनुसार, 18 जून 2020 को चौकन्ना रामचंदर गांव निवासी दिलीप मौर्य ने महराजगंज थाने में तहरीर दी थी। आरोप था कि मकान का पानी बहने को लेकर हुए विवाद में अजय मौर्या और सुशीला देवी ने उनकी मां भागमती देवी के साथ लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मामले में महराजगंज थाने पर मु0अ0सं0 155/2020 के तहत धारा 304(2), 34 और 504 भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से मुकदमे में आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
पुलिस के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद 24 सितंबर 2026 को विशेष पॉक्सो/गैंगस्टर कोर्ट, आजमगढ़ ने अजय मौर्या पुत्र सीताराम और सुशीला देवी पत्नी सीताराम, निवासी चौकन्ना रामचंदर, थाना महराजगंज को दोषसिद्ध करार दिया। दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 55-55 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
586 ग्राम गांजा रखने के मामले में दोषी को जेल में बिताई अवधि की सजा
अदालत ने 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया
आजमगढ़। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत अवैध मादक पदार्थ रखने के मामले में भी अदालत ने एक आरोपी को दोषी करार दिया है। एएसजे-3, आजमगढ़ की अदालत ने ज्ञानप्रकाश उर्फ जयप्रकाश को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास की सजा सुनाते हुए 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
पुलिस के अनुसार, 8 मई 2013 को चेकिंग के दौरान तत्कालीन उपनिरीक्षक वीरेंद्र बहादुर सिंह की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर आरोपी ज्ञानप्रकाश उर्फ जयप्रकाश पुत्र शीतला प्रसाद पाठक, निवासी कोलपांडेय, थाना कोतवाली, आजमगढ़ के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने उसके कब्जे से 586 ग्राम गांजा बरामद होने का दावा किया था।
मामले में कोतवाली थाने पर मु0अ0सं0 554/2013 के तहत धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मुकदमे में अभियोजन की ओर से छह गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
पुलिस के मुताबिक, प्रभावी पैरवी के बाद 24 सितंबर 2026 को एएसजे-3, आजमगढ़ की अदालत ने ज्ञानप्रकाश उर्फ जयप्रकाश को दोषसिद्ध करार देते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।