सरायमीर, आजमगढ़, 18 सितंबर। सोशलिस्ट किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने सरायमीर थाना क्षेत्र के शाहपुर (सदरपुर) गांव पहुंचकर पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद साबिर के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में किसान नेता राजीव यादव, कलीम जमाई, पूर्व फौजी जय प्रकाश सिंह, डॉ. राजेन्द्र यादव, जुल्फेकार, अवधेश यादव, नंदलाल यादव और दुर्गा यादव शामिल रहे।
परिजनों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उनके अनुसार 8 सितंबर की सुबह करीब नौ बजे पुलिस गांव पहुंची थी और साबिर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने आसपास के कई घरों में भी तलाशी ली और घरों में बने भोजन तथा फ्रिज में रखी सामग्री के बारे में जानकारी की। उनके मुताबिक पुलिस ने यह कार्रवाई उसी सुबह कुंवर नदी के किनारे मिले गोवंश के अवशेषों के मामले में किए जाने की बात कही थी।
परिजनों ने पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें 9 सितंबर की रात मुठभेड़ के दौरान साबिर के पैर में गोली लगने की बात कही गई थी। उनका कहना है कि यदि साबिर को 8 सितंबर की सुबह ही पुलिस अपने साथ ले गई थी तो अगले दिन रात हुई कथित मुठभेड़ के घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
इस मामले में पुलिस का अलग पक्ष है। पुलिस के अनुसार, 8 सितंबर को कुंवर नदी के किनारे प्रतिबंधित पशु के अवशेष मिलने के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने 9 सितंबर की रात चार संदिग्धों की घेराबंदी करने और इस दौरान साबिर द्वारा पुलिस टीम पर फायरिंग किए जाने का दावा किया था। पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में साबिर के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार किया गया।
प्रतिनिधिमंडल के समक्ष परिजनों ने मांग रखी कि साबिर को थाने ले जाने और बाद में थाने से बाहर ले जाने के समय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराई जाए तथा जांच में उसे शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस ने किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों को चिन्हित किया।
परिजनों ने बताया कि साबिर अनाथ है और अपनी नानी के घर रहकर मजदूरी करता था। उनका आरोप है कि साबिर के अलावा गांव के सैफ, आजम और असजद को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था।
सोशलिस्ट किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि घटनाक्रम से जुड़े सभी उपलब्ध साक्ष्यों, विशेषकर सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की कार्रवाई के रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
नोट: परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप और पुलिस का घटनाक्रम संबंधी दावा अलग-अलग हैं। साबिर के खिलाफ लगे आरोपों और मुठभेड़ की परिस्थितियों का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।