आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 25 जून -- जिला कृषि अधिकारी डा0 उमेश गुप्ता ने बताया कि आज 25 जुन को पूर्वान्ह में जनपद के विकास खण्ड मार्टिनगंज, अहरौला एवं मिर्जापुर, टिड्डी दल की आने की सूचना प्राप्त हुई। प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कृषि विभाग के कर्मचारियों को निरन्तर कृषकों से सम्पर्क बनाये रखने के निर्देश दिये गये ताकि टिड्डी दल के बारे में जानकारी प्राप्त होती रहे।
उन्होने बताया कि टिड्डी दल एक साथ लाखांे की संख्या में गमन करते है। जिस क्षेत्र में इनका आक्रमण होता है वहाॅ के क्षेत्र की हरियाली चट कर विरान कर देते है। इस कीट की वयस्क टिड्डियाॅ हवा की दिशा में एक दिन में 100 से 150 कि0मी0 की दूरी तय कर लेती है। टिड्डी दल प्रायः सूर्यास्त के समय किसी न किसी पेड़ पौधों पर सूर्योदय होने तक आश्रय लेते है। आश्रय के समय ही समस्त वनस्पतियों को आर्थिक नुकसान पहुॅचाते है। एक मादा टिड्डी भूमि में 500 से 1500 अण्डे देकर सुबह उड़ जाती है। इनके नियन्त्रण के लिये संस्तुत रसायनों के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात्रि 11ः00 बजे से सुबह 9ः00 बजे तक होता है।
उन्होने बताया कि इसके नियन्त्रण के विभिन्न विधियांे का प्रयोग करे। जिसमें यांत्रिक विधि के अन्तगर्त टिड्डी दल को खेतों के आस-पास दिखाई देते ही किसान भाई टोलियाॅ बनाकर सायं काल के समय थाली, ढोल, नगााड़े, घण्टियां, डी0जे0 एवं पटाखे आदि की तेज आवाज करके इनको भगा सकते है। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग कर भी टिड्डियों को एकत्रित करके नष्ट किया जा सकता है। टिड्डी दल के आकाश में दिखाई देने पर घास-फूस जलाकर धूआॅ करें। टिड्डी दल के आक्रमण के पश्चात कीटनाशक उपलब्ध न होने की दशा में टैªक्टर चालित पावर स्प्रेयर के द्वारा पानी की तेज बौछार से भी इन्हे भगाया जा सकता है।
इसी के साथ ही जैविक विधि में नियंत्रण के लिये कृषक भाई एजाडीरेक्टीन (नीम आॅयल) 1.50 से 2.00 ली0 प्रति हेक्टेयर 600 से 700 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़कांव करें।
रासायनिक नियंत्रण के अन्तगर्त टिड्डियों का प्रकोप होने पर क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत ई0सी0 1200 मिली0, लेम्डा साइहेलोथ्रीन 5 प्रतिशत ई0सी0 400 मिली0 या बेन्थियों कार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्रा0, 500 ली0 पानी में प्रति हे0 की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें या फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह पत्तियों पर ओस देखकर बुरकाव करें, साथ ही साथ राख का बुरकाव करके भी क्षति को कम किया जा सकता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा कृषि विभाग के समस्त प्राविधिक सहायकों को निर्देशित किया गया कि टिड्डी दल की स्थिति पर निगरानी रखें। तथा नामित नोडल अधिकारी से निरन्तर सम्पर्क बनायें रखें, साथ ही साथ किसानों को सलाह देते समय इस बात को अवश्य बतायें कि सब्जियों पर नियंत्रण के लिये रसायन का प्रयोग करने से बचें। टिड्डी दल के खेत में बैठने के उपरान्त उनके अण्डो को नष्ट करने हेतु खेत की गहरी जुताई कर दें।
टिड्डी दल के आक्रमण होने की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन तक तत्काल पहुचायें।
इनके आक्रमण की दशा में जनपद स्तर पर बने कन्ट्रोल रुम मोबाइल नं0 9919588753, 9450809578, 9260951598 एवं 9415902075 पर जानकारी उपलब्ध करायें या क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ के फोन नं0 0522-2732063 अथवा अपर निदेशक कृषि रक्षा लखनऊ को फोन नं0- 0522-2205868 पर भी सूचित कर सकते है।