आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
फोन आते ही बताए गए गंतव्य पर पहुंच कर जरूरतमंदों को सेवा देने में तत्पर।
कोरोना काल में महिलाओं और बच्चों को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने की निभाई जिम्मेदारी।
आजमगढ़ 10 सितम्बर -- मरीजों की जरूरत पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बनी 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा पर जिलाधिकारी राजेश कुमार द्वारा स्वयं मानीटरिंग की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों को त्वरित गति से एंबुलेंस सेवा का लाभ समय से मिल सके और समाज का आखिरी व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके। कोरोना काल में 108 सेवा की एंबुलेंस संकट मोचक की भूमिका में नजर आई। एम्बूलेंस पायलट पूरे तन मन से 24 घंटे फोन कॉल आते ही बताए गए स्थान पर पहुंच कर लोगों को सेवा देने का कार्य करते नजर आए।
108 और 102 एम्बुलेंस सेवा के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रभाकर यादव ने बताया कि कोरोना काल में 108 एम्बुलेंस से अगस्त 2020 में 430 कोरोना पॉजिटिव को कोविड एल-1, जिला अस्पताल एवं बीएचयू वाराणसी में भर्ती कराया गया, जबकि 102 एंबुलेंस के द्वारा अगस्त में 6,271 महिलाओं और एक साल से कम उम्र के बच्चों को अस्पताल लाया गया एवं उनको घर सुरक्षित छोड़ा गया। 108 एंबुलेंस सेवा के द्वारा अगस्त में लगभग 2,450 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में सुरक्षित भर्ती कराया गया।
प्रभाकर ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 102 सेवा की 52 एंबुलेंस, 108 सेवा की 51 एवं एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) सेवा की 2 एंबुलेंस मौजूद हैं। इनमें से 108 सेवा की 26 एवं 2 एएलएस एम्बुलेंस को कोविड कार्यों में लगाया गया है। जबसे कोरोना महामारी शुरू हुई है, उसी दौरान से नोडल अधिकारी के निर्देश पर कोरोना मरीजो के लिए 108 एंबुलेंस को आरक्षित कर लिया गया था और उनके माध्यम से मरीजों को उनके घरों से लाकर एल-1 हॉस्पिटल में शिफ्ट कराने का कार्य किया गया। इसके साथ ही गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल एवं बीएचयू वाराणसी पहुंचाकर समय रहते एडमिट कराने के साथ-साथ ही मरीजों को भी समय से पीएचसी, सीएचसी, जिला अस्पताल एवं बीएचयू वाराणसी अथवा लखनऊ पहुंचाकर उनकी जान बचाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
एम्बुलेंस सेवा के नोडल अधिकारी तथा एसीएमओ डाॅ0 एके सिंह ने एम्बुलेंस कर्मियों के सेवा भाव को सराहा है। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंसकर्मियों के अंदर सेवा भाव है। इसलिए ही फोन आते ही मरीजों के पास पहुंचने और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने में लग जाते हैं। बिना किसी डर भय के उन्होंने कोरोना उपचाराधीनों को लेकर हॉस्पिटल तक शिफ्ट करवाया है। उन्हें सही समय पर इलाज के लिए सही जगह पर पहुंचाया।
