आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
12 साल की उम्र में छोड़ा था घर 39 वर्ष बात पहुंचे अपने गृह जनपद।
आज़मगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवारा खास राजा में जन्मे रामसकल पटेल (अब रामसेवक दास) महाराष्ट्र के सत्य पंचमेश्वर पंचायती उदासीन अखाड़ा के महंत हैं। उन्होंने तहसील पहुंचकर अपनी बहन माधव का पुरा निवासी झिनकी देवी को अपनी पैतृक 97.5 एयर जमीन दान कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामसकल पुत्र सहदेव जो मां-बाप के इकलौते पुत्र थे उनकी एक बहन भी है। सन् 1982 मेें 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना घर बार छोड़ दिया और महाराष्ट्र के गोमुख आश्रम आमला गांव में पहुंचकर सन्यासी बन गए। वर्तमान समय में अखाड़ा उदासीन के महंत हैं और अपने गुरु की गद्दी संभाल रहे है।
39 साल बाद पहुंचे महन्त को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही लेकिन वह न तो अपने पैतृक गांव गए और न ही अपनी बहन के घर तहसील से सीधे वाराणसी चले गए जहाँ से वह महाराष्ट आश्रम जाएंगे।